पुलकित ने कहा कि अदालत में धारा-302 से संबंधित कई मुकदमे लंबित हैं, लेकिन हमारे केस में जल्द तारीख लगा दी जा रही है। अदालत में आर्य ने पुलिस व प्रशासन की मौजूदगी में जानलेवा हमला किए जाने, रिजॉर्ट तोड़े जाने, मुकदमे से अधिवक्ता हटाए जाने व फैक्ट्री में आग लगाए जाने की बात भी कही। मृतका का कमरा तोड़कर साक्ष्यों को नष्ट करने का काम किया गया, लेकिन कानूनी दृष्टि से शासन-प्रशासन की इस कार्रवाई में किसी को आरोपी नहीं बनाया गया। यह मेरे खिलाफ एक पक्षीय कार्रवाई है।
अभियोजन पक्ष से जिला शासकीय अधिवक्ता प्रदीप कुमार भट्ट ने बताया कि प्रार्थना पत्र में दिए गए केस ट्रांसफर के तथ्य आधारहीन हैं। अभियोजन पक्ष द्वारा पहले केस ट्रांसफर के लिए दायर की गई याचिका भी अदालत खारिज कर चुकी है। सत्र न्यायाधीश पौड़ी अजय चौधरी की अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखते हुए सुनवाई की तिथि एक मार्च नियत की है।