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यहां जानवरों का 'कफन' बन रही है बर्फ की चादर

Wed, 05 Mar 2014 10:01 AM IST
अमर उजाला, त्यूनी
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त्यूनी में बर्फबारी के कारण कैद जनजातीय क्षेत्र के दुर्गम गांवों के बाशिंदे बेहद मुश्किल में हैं।
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मोटी जमी बर्फ हर रोज पशुओं के लिए मौत का कारण बन रही है। बंद रास्तों के बीच जैसे-तैसे खुद के लिए भोजन-पानी की व्यवस्था कर रहे ग्रामीणों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

जा चुकी है कई दुधारू मवेशियों की जान

चारापत्ती के अभाव और कंपकंपाती ठंड के चलते बीमार हो रहे दुधारू पशु दम तोड़ रहे हैं। सावड़ा और डुंगरी गांव में भूख और उपचार के अभाव में अब तक करीब 12 दुधारू मवेशियों की जान जा चुकी है।

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ग्रामीणों के अनुसार कई मवेशी ठंड लगने से बुखार की चपेट में हैं। इलाके में13 फरवरी को हुई बर्फबारी के बाद से त्यूनी-चकराता मोटर मार्ग बंद है। इस वजह से इस मार्ग से जुड़े गांवों में खाने-पीने के लाले पड़े हैं।

14 गांवों की आबादी बर्फ में कैद

इन गांवों में करीब एक से डेढ़ फीट तक बर्फ जमी है। सैंज, कुलैन, फाटा, कथियान, डांगुठा, पुलिंग, कुनवा, गोरछा, डुंगरी समेत करीब 14 गांवों की आबादी बर्फ में कैद होकर रह गई है।

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मार्ग बंद होने से ग्रामीण खुद के लिए तो जैसे-तैसे राशन-पानी जुटा रहे हैं लेकिन मवेशियों के लिए चारापत्ती और पानी की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं। भूखे पेट मवेशी ठंड बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं।

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ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों में बर्फ जमी होने से चारापत्ती का इंतजाम नहीं हो पा रहा है। बंद रास्तों के कारण पशुओं के लिए दवा भी नहीं ला पा रहे हैं।

दम तोड़ रहे पशु, बेबस ग्रामीण

बर्फबारी के कारण ठंड लगने और भूख से महेंद्र सिंह के तीन बछड़े और एक गाय, संतराम के दो बछडे़ और एक गाय, चंदर सिंह की दो गायें, पूरण नाथ के दो बछड़े और धन सिंह की एक गाय और एक बछड़ा दम तोड़ चुके हैं।

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ग्रामीणों का कहना है कि पशुपालन ही उनका मुख्य व्यवसाय है। पशुओं की मौत से उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। बीमार और भूखे पशुओं को मरते देखना विवशता हो गई है।
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त्यूनी-चकराता मार्ग से आवाजाही बंद

दोनों गांवों की त्यूनी स्थित पशु चिकित्सालय से दूरी जहां 35 किलोमीटर है, वहीं चकराता से तीस किलोमीटर। बर्फबारी से रास्ता बंद होने के कारण पशुपालक दवाओं का इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं।

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इन गांवों की आवाजाही का मुख्य रास्ता त्यूनी-चकराता मोटर मार्ग है, लेकिन 13 फरवरी को हुई बर्फबारी के बाद से मार्ग बंद हो गया है। जिस कारण ग्रामीण आवाजाही नहीं कर पा रहे हैं।

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शीघ्र ही डाक्टरों की टीम गठित कर पशुओं के इलाज के लिए प्रभावित गांवों में भेजी जाएगी।
- राकेश नेगी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी देहरादून
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