गंगा नहीं भगवती गंगा मानने से बचेगी पवित्रता : डॉ. रामविनय
डॉ. रामविनय सिंह ने कहा- गंगा को केवल नदी नहीं, भगवती गंगा समझेंगे तो आध्यात्मिक चेतना उत्पन्न होगी। जिससे इसकी पवित्रता की रक्षा होगी। जो धरती को जल से पूर्ण कर दे, वह कुंभ कहलाता है। पौराणिक युग में समुद्र मंथन के कथानक के साथ इसका प्रसंग आया है। स्कंद पुराण में कई प्रसंग आए हैं। समुद्र मंथन से जो अमृत कलश निकला, उसे इंद्र देवता के पुत्र लेकर भागते हैं। भागते समय 12 स्थानों पर अमृत की बूंदें गिरती हैं। चार स्थान पृथ्वी और आठ स्थान देवलोक में हैं। देवलोक में भी कुंभ होता है। डॉ. सिंह ने कहा, धर्म मानव सभ्यता का सबसे बड़ा वैज्ञानिक अनुसंधान है।
सनातन संस्कृति का सेलिब्रेशन है महाकुंभ: डॉ. डंगवाल
डॉ. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि महाकुंभ के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहलू हैं। यह सनातन संस्कृति का सेलिब्रेशन है। कुंभ का आयोजन वैज्ञानिकता के आधार पर होता है। यह पश्चिमी देशों के लिए भी अद्भुत है। यहां हठयोग, नागा साधु से लेकर संस्कृति के सभी संवाहकों को सम्मान मिलता है। कुंभ में समाधान है। पूरे विश्व की अराजक सोच का समाधान है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि हमें इतने बड़े सांस्कृतिक, धार्मिक आयोजन को विकास से भी जोड़ना है।