आईआईटी रुड़की देश के छात्रों को हिंदी के प्रयोग के लिए प्रेरित करने के साथ ही हर साल 15 से 20 विदेशी छात्रों को भी हिंदी सिखा हा है। इसका उद्देश्य विदेशों तक हिंदी भाषा का प्रचार और आपसी संवाद को और बेहतर बनाना है। संस्थान में अंग्रेजी के साथ-साथ राजभाषा में कार्य करने की संस्कृति को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर का संस्थान होने के नाते आईआईटी रुड़की के लिए हिंदी का अधिक से अधिक से प्रयोग किसी चुनौती से कम नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से संस्थान राजभाषा नियमों के अनुरूप द्विभाषी कार्यप्रणाली विकसित कर रहा है।
संस्थान के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के अध्यक्ष एवं संस्थान के हिंदी प्रकोष्ठ के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेेंद्र कुमार ने बताते हैं कि संस्थान में मंथन पत्रिका का प्रकाशन इसी उद्देश्य से किया जा रहा है कि पाठकों को विज्ञान एवं तकनीकी से जुड़े लेख हिंदी में उपलब्ध हो सकें।
इसके अलावा अधिक से अधिक सरकारी कार्य अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी किए जा रहे हैं। वहीं, सालभर हिंदी पर कई व्याख्यान मालाएं, संगोष्ठी और प्रतियोगिता आदि का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि संस्थान में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों को हिंदी पढ़ाने के लिए हिंदी प्रकोष्ठ साप्ताहिक कक्षाएं भी आयोजित कर रहा है। इसके माध्यम से हर साल 15 से 20 छात्रों को कामकाजी हिंदी का ज्ञान दिया जा रहा है।
प्रो. आशा कपूर पुरस्कार ने जगाई अलख
विभागाध्यक्ष प्रो. नागेंद्र कुमार ने बताया कि मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग की रिटायर्ड प्रो. आशा कपूर ने करीब पांच साल पूर्व दस हजार के पुरस्कार की शुरुआत की थी। उनके नाम पर हिंदी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारी को दस हजार रुपये का प्रो. आशा कपूर पुरस्कार प्रदान किया जाता है। इससे हिंदी भाषा के प्रति उत्साह का संचार हो रहा है।