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इंटरनेशनल हाउस वाइफ-डे पर अनूठी पहल, गृहणियां निकालेंगी अखबार

Tue, 03 Nov 2015 08:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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निकिता रावत और उर्मिला कंडवाल (बाएं से)
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उत्तराखंड उदय उत्सव के दौरान इंटरनेशनल हाउस वाइफ-डे (तीन नवंबर) को कुछ खास तरीके से सेलीब्रेट करने के लिए अभिनव पहल के तहत उत्तराखंड की चार हाउस वाइफ प्रीति गुप्ता, नितिन हटवाल, निकिता रावत और उर्मिला कंडवाल मंगलवार को अमर उजाला गेस्ट एडिटर कांटेस्ट में गेस्ट एडिटर चुनी गई हैं। यह चारों हाउस वाइफ, तीन नवंबर को बतौर गेस्ट एडिटर ‘अमर उजाला’ का काम-काज देखेंगी।

यह खास अखबार अंक चार नवंबर की सुबह पाठकों के हाथों में होगा।। प्रदेश में हाउस वाइव्स के लिए संभवत: अपने ढंग के इस अनोखे आयोजन के तहत गेस्ट एडिटर पैनल चुनने के लिए बाकायदा हाउस वाइफ गेस्ट एडिटर कांटेस्ट का आयोजन किया गया था।
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चार अन्य हाउस वाइफ बीना सिद्दीकी, विनीता अग्रवाल, पूजा असवाल और प्रेमा खुल्बे को ‘स्टार होटल कांटेस्ट’ के तहत चुना गया। चारों हाउस वाइफ को परिवार सहित (पति और बच्चों के साथ) स्टार होटल में डिनर दिया जाएगा। इसके प्रयोजक शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग है।

लॉटरी ड्रॉ के जर‌िए चुनी गईं 20 मह‌िलाएं

तस्वीर- प्रीति गुप्ता और नितिन हटवाल (बाएं से)

‘अमर उजाला’ ने वुमेन इंपावरमेंट के उद्देश्य से पहली बार इस अभिनव कार्यक्रम की शुरुआत की। दो चरणों में हुए इस कांटेस्ट में 1933 एंट्री आईं। इनमें से 20 का चयन लॉटरी ड्रॉ के जरिए हुआ। इन हाउस वाइफ में से आठ विजेताओं को चुना गया। इस आयोजन का मूल उद्देश्य लोगों को यह बताना है कि हाउस वाइफ क्या नहीं कर सकती, उन्होंने स्वयं घर-परिवार संभालने की भूमिका का चुनाव किया है, वरना वे तो देश भी चला सकती हैं।

प्रथम चरण में चुनी गई हाउस वाइफ को सोमवार को निरंजनपुर स्थित होटल वॉयसरॉय इन में आमंत्रित किया गया। जहां सभी प्रतियोगियों को लिखित परीक्षा के लिए 15 मिनट का वक्त मिला। इसके बाद हुए इंटरव्यू में महिलाओं को अपने विचार प्रस्तुत करने को कहा गया। जिसमें हाउस वाइफ ने पूरे कॉन्फिडेंस के साथ अपनी बात को बेहद खूबसूरत ढंग से प्रस्तुत किया। ‘अमर उजाला’ का चार नवंबर का अंक पूरी तरह से इन हाउस वाइफ गेस्ट एडिटर पैनल की सोच पर आधारित होगा। सभी विजेताओं को व्यक्तिगत रूप से सूचित कर दिया गया है। स्टार होटल डिनर की विजेताओं को डिनर की तारीख और समय के बारे में व्यक्तिगत रूप से सूचित किया जाएगा।

त्यौहार जैसा लग रहा था माहौल
प्रथम चरण में चुनी गई हाउस वाइफ ने कांटेस्ट को खूब एंजॉय किया। हालांकि कुछ को इंटरव्यू का डर, तो किसी को थोड़ी घबराहट हो रही थी। कुछ देर बाद उन्हें ‘अमर उजाला’ परिवार के साथ घुल मिलकर बेहद अच्छा लगा। इंटरव्यू की घबराहट कहीं दूर जाकर गायब सी हो गईं। ग्रुप डिस्कशन में सभी ने खुले तौर पर अपनी बातें रखीं।

चार हाउस वाइफ बनी स्टार होटल विजेता

तस्वीर में- विनीता अग्रवाल, पूजा असवाल (ऊपर बाएं से) तथा बीना सिद्दीकी और प्रेमा खुल्बे (नीचे बाएं से)

चार हाउस वाइफ को गेस्ट एडिटर पैनल में शामिल होकर अखबार निकालने जैसा गौरवपूर्ण मौका देने के अलावा ‘अमर उजाला’ गृहिणियों की एक दिली ख्वाहिश भी पूरा करने का जरिया बनना चाहता है। ‘अमर उजाला’ ने एक सर्वे के जरिए मध्यमवर्गीय परिवार की तीन सौ महिलाओं से उनकी दिली ख्वाहिश पूछी। बहुमत में लब्बोलुआब यह सामने आया कि वह एक दिन पति और बच्चों से कहना चाहती हैं कि चलो आज मैं तुम्हें स्टार होटल में डिनर कराकर लाती हूं। मगर क्या कह पाती हैं, नहीं। दरअसल गृहस्थी के खर्चे से जोड़तोड़ कर बचाए गए रुपये वे यूं ही एक डिनर पर नहीं खर्च कर सकती। सुगृहिणी है, इसे इमरजेंसी के लिए बचा कर रखेंगी। यही तो इनकी खासियत है। ‘अमर उजाला’ इस बार इंटरनेशनल हाउस वाइफ डे पर आपकी इस इच्छा को साकार करने का माध्यम बनेगा। इस कंप्टीशन के तहत गेस्ट एडिटर पैनल में चयनित चार हाउस वाइफ के अलावा चार अन्य हाउस वाइफ का स्टार होटल के लिए चयन किया गया। ...तो फिर इतरा कर हसबैंड को सरप्राइज देकर कहें... सुनो, आज हम स्टार होटल में डिनर करने चलते हैं।


अमर उजाला के इस कंपीटिशन के लिए जब मैं अपने 6 वर्षीय बेटे वेदांश को लेकर होटल वॉयसरॉय इन पहुंची तो वह बेहद खुश हुआ। पहली बार बेटे ने मुझे बोला मम्मी आप बहुत अच्छे हो, मुझे स्कूल से लेकर होटल ले गए, जहां हमने नाश्ता किया। अब बेटा स्टार होटल में डिनर करेगा तो वह कितना खुश होगा।
-प्रेमा खुल्बे, बद्रीश कॉलोनी

स्टार होटल में डिनर का मौका मिला, यह सुनकर वाकई बेहद अच्छा लग रहा है। अपने परिवार को स्टार होटल में ले जाने की बात इन दिनों हर किसी के बस में नहीं है। हमें यह मौका मिला है, वो भी जबकि हम पैसा नहीं कमाते। कम से कम एक दिन तो परिवार को डिनर करा सकेंगे। बहुत अच्छा लग रहा है।
-बीना सिद्दकी, मेहूंवाला

मुझे स्टार होटल में डिनर का मौका मिला, यह सुनकर बेहद अच्छा लग रहा है। कम से कम कहीं तो हमारी अलग पहचान बनी। इस डिनर का अपना अलग मजा होगा। हमारे अंदर एक खुशी होगी कि यह हमने खुद कमाया है। अपनी मेहनत से घरवालों को डिनर करा रहे हैं।
-विनीता अग्रवाल, हरिद्वार

अमर उजाला ने हमें यह मौका दिया, इसके लिए हम सभी हाउस वाइफ धन्यवाद देती हैं। घर का कामकाज करते हैं, लेकिन उससे हमें कोई पहचान थोड़ी न मिलती है। अमर उजाला ने हमारे बारे में सोचा। हमें एक पहचान दिलाई। इसके साथ ही डिनर का भी मौका दिया। बेहद खुशी हो रही है।
-पूजा असवाल, बंजारावाला
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जानिए, क्या कहती हैं हाउस वाइफ-डे गेस्ट एडीटर

हाउस वाइफ को ऐसा मौका देना, वाकई अमर उजाला की गजब की सोच है। टॉप-20 में सेलेक्ट होने के बाद हौसले बुलंद हो गए थे कि किस्मत मेरे साथ है। मेरे पति को मुझ पर पूरा भरोसा था। यही वजह थी कि वह मुझे और बच्चे को साथ लेकर दून आए। गेस्ट एडीटर बनने पर मुझसे कहीं ज्यादा उन्हें खुशी है।
-निकिता रावत, कोटद्वार

वाकई यह जीवन की बड़ी खुशी है। अमर उजाला अखबार में गेस्ट एडीटर बनने का मौका वो भी एक हाउस वाइफ को, ऐसी अभिनव सोच केवल अमर उजाला की हो सकती है। इससे मैं ही क्या, मेरी जैसी सभी हाउस वाइफ खुश होंगी।  
-नितिन हटवाल, नेहरूग्राम

मुझे तो अब तक यकीन नहीं हो रहा है। मेरा कांटेस्ट में आना परीक्षा देना सफल हो गया है। अब हम भी समाज के दूसरे लोगों को अपने टैलेंट के बारे में बता सकते हैं। यह एक बड़ी उपलब्धि है। ऐसा मौका देने के लिए अमर उजाला को धन्यवाद।
-प्रीति गुप्ता, रुड़की

अब तक मैंने अमर उजाला की कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया, लेकिन कभी इनाम नहीं निकली। इस बार सीधे मैं गेस्ट एडीटर चुनी गई हूं। मैं रोज अमर उजाला बेहद अच्छे से पढ़ती हूं। अमर उजाला ने मेरा और मुझ जैसी गृहणियों का आत्मविश्वास बढ़ाया है।
-उर्मिला कंडवाल, सीमाद्वार
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