राष्ट्रीय स्तर पर भी मिला पुरस्कार
मेरी नजर में अमर उजाला एक आम आदमी का अखबार है। आम आदमी और निम्न वर्ग तक की समस्याओं को पूरी वरीयता दी जाती है। अक्सर यह सुनने को मिल जाता है कि किसी शोषित, महिला व गरीब पर कोई अत्याचार होता है तो वह न्याय के लिए पुलिस के पास न जाकर अमर उजाला के दफ्तर में पहुंच जाता है। यह लोगों का भरोसा ही है जो न्याय के लिए उन्हें अमर उजाला के दफ्तर की ओर ले जाता है।
अमर उजाला ने जिस तरीके से नारी निकेतन में एक मूक बधिर संवासिनी के साथ दुष्कर्म की घटना को उठाया और अंत में उसे अंजाम तक पहुंचाया, इसके लिए अमर उजाला आज भी बधाई का पात्र है। मेरे संगठन उत्तरांचल महिला एसोसिएशन (उमा) ने भी न्याय की इस लड़ाई में संवासिनी का साथ दिया। अमर उजाला को इस मुहिम को मुकाम तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी मिला।
आज भी इस अखबार का रुतबा इतना है कि विभागीय अधिकारी इसकी खबर का संज्ञान लेकर समस्या का समाधान करने के साथ तुरंत कार्रवाई का आदेश देते हैं। एक दिन किसी कार्य से मैं एक दफ्तर में गई थी। मैंने देखा दफ्तर की बैठक चल रही है।
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एक अधिकारी के हाथ में अमर उजाला था। उसमें छपी किसी जनसमस्या के बाबत वह अधीनस्थ अधिकारियों को समस्या के शीघ्र समाधान करने के लिए निर्देशित कर रहे थे। वाकई अमर उजाला ने हमेशा से जनता और सरकार के बीच एक सेतु का कार्य किया है। मैं अमर उजाला को 26वीं वर्षगांठ पर बधाई एवं शुभकामनाएं देती हूं।
- साधना शर्मा, अध्यक्ष, उत्तरांचल महिला एसोसिएशन