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अफसोस, नेताजी नहीं कर रहे उद्योगों को याद

Mon, 07 Apr 2014 01:28 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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लोकसभा चुनाव की सरगर्मी चरम पर है। विभिन्न पार्टियों के प्रचार, वादों का दौर जारी है।
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बेहद स्थानीय होने के बावजूद आज भी जनता के लिए पानी, बिजली, सड़क का मुद्दा सबसे बड़ा बना हुआ है। उद्योग, व्यापार किसी भी पार्टी या उसके नुमाइंदे की प्राथमिकता में नहीं।

कोई पार्टी नहीं कर रही उद्योग की बात
अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से अमर उजाला के पटेलनगर स्थित कार्यालय परिसर में हुई चुनावी चौपाल में उद्यमी, व्यापारी पहुंचे तो उन्हें इस बात का अफसोस था कि जिस उद्यम, व्यापार को किसी भी राज्य के विकास की रीढ़ माना जाता है, उसकी बात कोई पार्टी नहीं कर रही।
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ऐसे में उद्यम, व्यापार आगे कैसे बढ़े? पहली जरूरत तो यही है कि पार्टियां अपने घोषणा-पत्र में उद्योगों को शामिल करे।

चौपाल में कुछ यूं रखी गई बात
पंजाब के एक उद्यमी की मिसाल से बात शुरू करूं। वह यहां यूनिट शुरू करना चाहता था, लेकिन इतने चक्कर कटाए गए कि आखिर उसे गुजरात जाकर यूनिट स्थापित करनी पड़ी।

आधारभूत ढांचे के साथ ही आपदा के बाद तबाह हुई सड़कों, संपर्क मार्गों की स्थिति सुधारनी जरूरी है। जड़ी-बूटी पर आधारित स्थानीय उद्यमों को भी विकसित किया जाए। जीएसटी पर भी स्थिति स्पष्ट हो।
- एनपी दीवान, प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल समिति

विकास ही मुद्दा है। विकास उद्योग से जुड़ा है, उद्योग निवेश से और निवेश रोजगार से। ऐसी नीति बने, जिससे विकास हो। टैक्सेशन की कठिन प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाए।

चुनाव में उतर रहीं पार्टियां अपने घोषणापत्र में उद्योग को जगह दें। रेल और सड़क कनेक्टिविटी बेहद जरूरी है। जल विद्युत परियोजनाओं में पर्यावरण, वन संबंधी एनओसी की जटिलता को देखते हुए गैस, पावर प्लांट पर जोर हो।
- अनिल मारवाह, सचिव, प्रांतीय इंडस्ट्रीज एसोसिएशन

नेशनल या स्टेट लेवल पर 2004 से लेकर 2010 के बीच विकास को लेकर बेहद सुस्त गति रही। राज्य को यहां यूनिट्स लगाने में छूट दी गई, लेकिन इसके खत्म होते ही निवेशक निकल लिए। यह न हो, इसकी कोशिश होनी चाहिए।

इसके लिए टैक्सेशन लाइन अप कराना जरूरी है। सिंगल विंडो सिस्टम ठीक से काम करे, यह भी आवश्यक है। पिछली सरकार के अच्छे फैसलों को लेकर उदारता बरती जाए।
- उमेश अग्रवाल, दून उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल

फिनिश्ड गुड्स यानी निर्मित वस्तुओं के आयात पर नियंत्रण हो। खास तौर पर प्लास्टिक और रोजगार का बड़ा जरिया बने वाले उद्यमों को लेकर ऐसी आयात नीति बने, जिससे स्थानीय उद्यमों पर असर न पड़े।

स्थानीय रोजगार प्रभावित न हो। फिलहाल जो नीति है, उसने स्थानीय उद्यमों की कमर तोड़ दी है। हर तरफ चीन का दबदबा देखने को मिलता है। इस पर नियंत्रण बेहद जरूरी है।
- अंकुर सिंघल, सेलाकुई इंडस्ट्रियल एरिया

राज्य का विकास पूरी तरह टूरिज्म पर टिका है। हास्पिटैलिटी इंडस्ट्री इसमें सहयोगी की तरह है। आपदा के बाद से यह सेक्टर पूरी तरह बैठ गया है। इसे खड़ा करने की दिशा में कवायद होनी चाहिए।

टूरिस्ट को यहां खींचने के लिए कदम उठाए जाने चाहिएं। खास तौर पर अन्य राज्यों की तरह प्रचार पर जोर हो। इसके साथ ही होटल, रेस्टोरेंट पर लगने वाले टैक्स को लेकर भी रियायत बरती जाए।
- तरुण आहूजा, दून हास्पिटैलिटी वेलफेयर एसोसिएशन

व्यापारियों की टैक्स से जुड़ी दिक्कतों का मुद्दा बड़ा है। इसे लेकर कोई भी राजनीतिक पार्टी गंभीर नहीं। इसके अलावा व्यापार, उद्यम के जरिए विकास का आधार बने व्यापारियों के लिए पेंशन प्लान लाया जाना चाहिए।
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इससे कम से कम एक व्यापारी को बढ़ती उम्र में नौकरीशुदा की तरह लाभ मिलेगा। वह लाभ-हानि की चिंता के बगैर अपने लिए एक निश्चित आय का लाभ उठा सकेगा। महंगाई बड़ा मुद्दा है ही।
- प्रतीक मैनी, पलटन बाजार व्यापार समिति

उद्यमी, व्यापारियों की नजर में टाप-10 मुद्दे:
1. इंडस्ट्री को पार्टियां घोषणा पत्र में शामिल करें
2. टैक्सेशन की प्रक्रिया को आसान बनाया जाए
3. सीएसटी की दर को केवल आठ फीसदी रखें
4. जड़ी-बूटी के लिए अलग नीति को दबाव बने
5. निर्मित वस्तुओं के आयात पर नियंत्रण जरूरी
6. पर्यटन विकास के लिए गंभीर कदम उठाए जाएं
7. गैस और पावर प्लांट लगाने की दिशा में काम हो
8. पूर्वाग्रह न हो, पिछली सरकार के अच्छे फैसले न बदलें
9. सिंगल विंडो सिस्टम को प्रभावशाली बनाया जाए
10. विकास मुख्य मुद्दा बने, आधारभूत ढांचा विकसित हो
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