सितारगंज के अंजनियां निवासी शिक्षिका सरिता राणा की हादसे में हुई मौत ने उनके परिवार की खुशियां छीन ली हैं। खेती किसानी कर किसी तरह जीविकोपार्जन कर रहे परिवार के लिए सरिता की शिक्षिका के पद पर नियुक्ति उम्मीद की किरण कम नहीं थी। गरीब परिवार की सरिता को सरकारी नौकरी मिलने पर बड़े सहारे की उम्मीद थी परंतु विधाता की गति न्यारी है जो परिजन उसे नई तैनाती स्थल पर खुशी खुशी विदा करने आए थे, उन्हें क्या पता था कि यह उनकी लाड़ली की अंतिम विदाई साबित होगी।
सरिता राणा के पिता रामभरोसे बुजुर्ग होने के साथ ही किसानी करते हैं। सरिता के भाई राजेंद्र सिंह भी किसानी करते हैं। रिश्ते के जीजा मुकेश सिंह ने बताया कि सरिता के घर की माली हालत कमजोर है। किसानी से किसी तरह जीविकोपार्जन होता है। सरिता के बीएड और टीईटी पास करने के बाद राजकीय प्राथमिक स्कूल डांग में पहली तैनाती मिलने पर परिवार में जश्न जैसा माहौल था।
परिजन अपनी लाडली को चौखुटिया तक तो सही सलामत पहुंचा आए थे लेकिन किसे पता था कि ये सफर कितना बड़ा दुख देगा। कार्यस्थल से तीन किलोमीटर पहले चिनौनी के सक्लें में सरिता हादसे का शिकार हो गई। हादसे के बाद चौखुटिया घाटी में भी शोक की लहर है। तमाम शिक्षकों ने घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए मृतका के परिजनों की हरसंभव मदद की बात कही है।