यदि सब कुछ एनआईएम (नेहरू पर्वतारोहण संस्थान) उत्तरकाशी की योजनानुसार चला तो केदानाथ धाम और पैदल मार्ग पर एटीवी (ऑल टरेन व्हिकल) दौड़ते हुए दिखाई देंगे।
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छह टायर वाले इस स्कूटर पर निर्माण और जरूरी सामग्री ढोई जाएगी। जिससे धाम और पैदल मार्ग पर पुनर्निर्माण कार्य में तेजी आएगी। गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक पैदल खड़ी चढ़ाई चढ़कर जाना पड़ता है।
वर्तमान में आपदा से क्षतिग्रस्त पैदल मार्ग का मरम्मत कार्य चल रहा है। रामबाड़ा से ऊपर केदारनाथ धाम पैदल मार्ग के पुनर्निर्माण का जिम्मा शासन ने एनआईएम को सौंपा है।
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ऊंची-नीची जमीन पर आसानी से चलता है यह वाहन
एनआईएम मार्ग निर्माण में आसानी के लिए देशी-विदेशी तकनीकी को अजमा रहा है। इसी क्रम में एटीवी को मंगाया गया है। यह वाहन स्कूटर के समान है। लेकिन इसमें छह बडे़-बडे़ टायर हैं।
जो ऊंची नीची जमीन पर स्कूटर को चलने में मदद करते हैं। इसलिए इस स्कूटर का नाम ऑल टरेन व्हिकल यानि कि हर जमीन का वाहन है। एनआईएम ने इसको रामबाड़ा तक पहुंचा दिया है।
एनआईएम के प्रधानाचार्य कर्नल अजय कोठियाल ने बताया कि एटीवी मल्टी परपज है। इसमें स्नोकटर और ट्राली लगाई जा सकती है। यह वाहन केदारनाथ की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के लिए उपयुक्त है।
क्योंकि यहां जेसीबी या अन्य मालवाहक वाहन नहीं पहुंच सकते हैं। ऐसे में एटीवी धाम और पैदल मार्ग पर छोटी-छोटी दूरी में सामान ढोने के लिए प्रयोग किया जाएगा।
एटीवी पर जोड़ने के लिए विशेष रुप से आठ गुणा पांच फीट की ट्राली डिजायन की गई है। यदि प्रयोग सफल रहता है, और एटीवी मंगाई जाएंगी।
बदरीनाथ नहीं जा पाई मंदिर समिति की टीम
भारी बारिश और बर्फबारी के कारण दूसरे दिन भी बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के कर्मचारियों और अधिकारियों की टीम बदरीनाथ धाम नहीं पहुंच पाई।
शनिवार को टीम जोशीमठ से रवाना तो हुई लेकिन बारिश नहीं थमने से लामबगड़ से ही जोशीमठ लौट आई। पहुंच गई। बताया जा रहा है कि टीम अब 25 अप्रैल को बदरीनाथ धाम जाएगी।
इसी दिन बदरीनाथ धाम में नियमित ड्यूटी करने वाले बीकेटीसी कर्मचारी भी धाम के लिए रवाना होंगे।
वहीं, कंचनगंगा से पैदल ही धाम में पहुंचे दिर समिति के 23 मजदूर शनिवार को बारिश और बर्फबारी के चलते न तो धाम में रंग-रोगन का कार्य शुरू कर पाए और न ही सीमेंट वर्क।
बर्फबारी से हालात हुए खतरनाक
बर्फबारी से कंचन गंगा में हाईवे खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। दिनभर बीआरओ के मजदूर यहां हाईवे पर आए हिमखंड को हटाने में लगे रहे।
दूरसंचार विभाग की टीम भी बदरीनाथ धाम नहीं पहुंच पाई है जिससे धाम में संचार सेवा भी कार्य नहीं कर पा रही है। धाम में ऋषि गंगा पर स्थित पावर हाउस को संचालित करने के लिए उरेडा की टीम भी धाम तक नहीं पहुंच पाई है।
मंदिर समिति के अधिकारी भूपेंद्र मैठाणी ने बताया कि मौसम साफ होने के बाद ही मंदिर समिति की टीम बदरीनाथ धाम जाएगी। लगातार मौसम खराब होने दिक्कतें बढ़ने लगी हैं।
हेमकुंड साहिब यात्रा की तैयारियां जोरों पर
सिखों के प्रसिद्ध तीर्थ हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं।
गोविंदघाट गुरुद्वारे की साफ-सफाई और धर्मशालाओं के सुधारीकरण के बाद 23 कार सेवक (स्वयं सेवक) अब यात्रा के मुख्य पड़ाव घांघरिया पहुंचे और यहां से बर्फ हटाकर पैदल रास्ता तैयार किया।
इंजीनियरिंग कोर के जवान भी रास्ते खोलने के लिए यहां पहुंच गए हैं। घांघरिया से छह किमी आगे हिमखंड अभी भी हेमकुंड साहिब पैदल मार्ग पर पडे़ हुए हैं।
सेवकों ने घांघरिया से तीन किमी आगे अटलाकुड़ी तक बर्फ हटाकर यात्रा के लिए पैदल रास्ता तैयार कर लिया गया है।
तीर्थयात्रा के लिए क्षतिग्रस्त पैदल मार्ग को किया सही
पैदल रास्ते से हिमखंडों को काटने के लिए शनिवार को 48 इंजीनियर कोर के 15 जवान हवलदार गुरुप्रीत सिंह की अगुवाई में घांघरिया पहुंच गए।
ये जवान हिमखंडों को काटने के साथ ही क्षतिग्रस्त पैदल मार्ग को तीर्थयात्रा के लायक बनाएंगे।
रूक-रूककर हो रही भारी बारिश और बर्फबारी में भी कार सेवक और सिख रेजीमेंट के जवान जो बोले सो निहाल के जयकारों के साथ आस्था पथ को खोलने में लगे हुए हैं।
रुद्रप्रयाग से पांच सिक्ख रेजीमेंट के 40 जवान भी शीघ्र हेमकुंड साहिब पैदल मार्ग को खोलने के लिए घांघरिया पहुंच जाएंगे। पंजाब प्रांत से आए स्वयं सेवक भी निशुल्क यात्रा मार्ग खोलने में लगी हुई है। जवानों और स्वयं सेवकों की मदद से 15 मई तक यात्रा मार्ग पूरी तरह से खोल दिया जाएगा। - सरदार सेवा सिंह, प्रबंधक, गोविंदघाट गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी