बैरागी तीन अखाड़ों के बैठक में शामिल होने को लेकर असमंजस बना है। बैरागी अखाड़ों ने हरिद्वार कुंभ में परिषद से नाराज होकर खुद को परिषद से अलग कर लिया था। ब्रह्मलीन श्रीमहंत नरेंद्र गिरि की षोडसी पर भी बैरागी अखाड़ों के संत शामिल नहीं हुए थे। परिषद के महामंत्री हरिगिरि ने बताया कि बैठक एवं प्राचीन परंपरा से अध्यक्ष चयन का एजेंडा बैरागियों को भेजा है। एजेंडा भेजना उनका दायित्व है। बैरागी सहमति देते हैं या नहीं, उनका विवेक है। बैरागी संत बैठक में शामिल नहीं होते हैं तो बाकी 10 अखाड़े के संत-महंतों के बीच नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा की जाएगी।
कार्यकारिणी में होते हैं 26 सदस्य
अखाड़ा परिषद की कार्यकारिणी में अध्यक्ष और महामंत्री के अलावा 26 सदस्य होते हैं। इनमें प्रत्येक अखाड़े से 2-2 प्रतिनिधि होते हैं। प्रयागराज में प्रस्तावित बैठक में यदि बैरागी तीन अखाड़े शामिल नहीं होंगे तो मौजूदा कार्यकारिणी में उनके सदस्यों के भविष्य में बने रहने पर भी विचार मंथन होगा।
परिषद अध्यक्ष की कुर्सी के लिए खींचतान मची है। 108 संतों, महामंडलेश्वरों और खालसों ने अध्यक्ष बनने की इच्छा जाहिर करते हुए मुझे पत्र भेजा है। ऐसे में प्राचीन परंपरा से ही 25 अक्तूबर को प्रयागराज में नए अध्यक्ष की घोषणा हो जाएगी।
- श्रीमहंत हरिगिरि, महामंत्री अखाड़ा परिषद