देवभूमि उत्तराखंड में एड्स/एचआईवी का दानव तेजी से पांव पसार रहा है। राज्य निर्माण के दो वर्ष बाद एड्स के मात्र 23 रोगी थे।
अप्रैल 2014 तक एचआईवी पॉजीटिव की संख्या बढ़कर 6164 पहुंच गई। यह जानकारी आरटीआई के तहत मिली है। राज्य में वर्ष 2002 में देहरादून में 15 और नैनीताल में 08 एचआईवी पॉजीटिव मिले थे।
तब अन्य 11 जिलों में एक भी एड्स रोगी नहीं था। वर्ष 2003 में 13 में से पांच जिलों में एक भी एड्स का मामला सामने नहीं आया।
सूचना के अधिकार के तहत हुआ खुलासा
जबकि वर्ष 2008 में राज्य के 13 में से एक भी जिला इससे अछूता नहीं रहा।
एड्स जैसी गंभीर बीमारी को रोकने और लोगों को जागरूक करने के लिए वित्तीय वर्ष 2010-2011 में 937215, 2011-2012 में 97384, 2012-2013 में 870631, 2013-2014 में 428842 रुपए विज्ञापन मद में खर्च किए गए।
आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. प्रमोद अग्रवाल गोल्डी की सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में इसका खुलासा हुआ है।
प्रदेश में 1929 को दी जा रही दवा
प्रदेश में स्थापित एआरटी केंद्रों में एचआईवी पॉजीटिव रोगियों को दवा दी जा रही है।
इसमें दून अस्पताल में 1181 और सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में 748 मरीज शामिल हैं।
2002 से 2014 (अप्रैल) तक एचआईवी पाजिटिव की कुल संख्या
अल्मोड़ा - 180
बागेश्वर - 127
चमोली - 97
चंपावत - 92
देहरादून - 2768
हरिद्वार - 507
नैनीताल - 1080
पौड़ी - 422
पिथौरागढ़ - 189
रुद्रप्रयाग - 97
टिहरी - 86
ऊधमसिंह नगर - 470
उत्तरकाशी - 49
योग - 6164