एआरटीओ दफ्तर का है वीडियो
अमर उजाला ने नितिका से इस मामले में जानकारी लेने को फोन किया लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। हालांकि मीडिया में दिए गए एक बयान में उनका कहना है कि अगर एक कथित फर्जी सर्टिफिकेट का मामला सुर्खियों में आया है तो इसका मतलब ये नहीं है कि लोग सभी दिव्यांग लोगों को जज करें। ऐसे कई लोग हैं, जिन्होंने अपनी दिव्यांगता के बावजूद यूपीएससी पास करने के लिए संघर्ष किया है। वास्तव में कड़ी मेहनत की है। सभी दिव्यांग का मीडिया ट्रायल नहीं होना चाहिए।
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उन्होंने मीडिया में बताया कि यह वीडियो उनके एआरटीओ रुड़की के कार्यालय के निरीक्षण का है। तब वह वहां एसडीएम थीं। उनके चैनल पर यह वीडियो आज भी आरटीओ ड्राइविंग टेस्ट हेडिंग के साथ उपलब्ध है, जिसे करीब 19 लाख लोग देख चुके हैं। उन्होंने मीडिया में कहा कि कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। यह उन्हें पता है कि वह कितना देख सकती हैं और कितना नहीं। अगर वह कुछ कर रही हैं या बिना चश्मे के टीवी देख रही हैं तो उन्हें किस तरह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, यह सिर्फ वही समझ सकती हैं। मेडिकल बोर्ड इसके लिए सर्टिफिकेट देता है। इसलिए बोर्ड जवाबदेह है। लोग कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि अगर किसी को कोई दिव्यांगता है, तो उसे दिखाया जाना चाहिए? अगर किसी को कोई समस्या है और वह दिखाई नहीं दे रही है, तो उसका पता नहीं लगाया जा सकता है।
इस रोग से पीड़ित हैं नितिका खंडेलवाल
आईएएस नितिका खंडेलवाल कोन रॉड डिस्ट्रॉफी रोग से पीड़ित हैं। यह आंख की गंभीर बीमारी है। इसमें इंसान की आंखों की रोशनी समय के साथ पूरी तरह खत्म हो सकती है। इसमें रेटिना की प्रकाश-संवेदी कोशिकाएं धीरे-धीरे खराब होने लगती हैं। बताया जाता है कि यह बीमारी 40 हजार लोगों में से एक को होती है।