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'दाखिले की दिक्कत, डीएम निकालेंगे हल'

Sun, 10 Aug 2014 10:55 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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12वीं पास बच्चों को इस सत्र में डिग्री कॉलेज दाखिले में दिक्कतें न आएं इसके लिए सरकार हरकत में आ गई है। इस काम को पूरा करने के लिए शिक्षा विभाग के साथ-साथ जिलाधिकारियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार और जवाबदेह बनाया गया है।
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जिलों में खाली पड़ी सरकारी बिल्डिंग या फिर किराये की बिल्डिंग में कॉलेज चलाने की तैयारी शुरू हो गई हैं। वहीं शिक्षकों की कमी पूरी करने के लिए सरकार सेवानिवृत्त शिक्षकों की मदद लेने जा रही है।

कोर्ट के आदेश के साथ सरकार को इस बात का भी डर सता रहा है कि दाखिले को लेकर कहीं उसे युवाओं की नाराजगी या आंदोलन का सामना न करना पड़े।

सीएम करेंगे उपायों पर चर्चा

कोर्ट के आदेश का असर उच्च शिक्षा विभाग पर साफ दिखा। शनिवार को छुट्टी के दिन सचिवालय स्थित उच्च शिक्षा विभाग के कर्मचारी और अधिकारी दिनभर इस कवायद में जुटे रहे कि किस तरह इस समस्या से निपटा जाए।

हल्द्वानी स्थित शिक्षा निदेशालय भी आलाधिकारियों के सम्पर्क में रहा। मुख्यमंत्री हरीश रावत रविवार को इस संबंध में बैठक बुलाकर किए जा रहे उपायों पर चर्चा करेंगे।

सरकार ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों से इस बात की इजाजत देने को कहा है जिन नए कॉलेजों केलिए सम्बद्घता के आवेदन दिए गए हैं।

कॉलेज खोला जा सकता है

वहां अगले 15 से 30 दिनों में अगर बिल्डिंग बनकर तैयार होने जा रही है उसकी अनुमति तत्काल दें। जिससे वहां स्टॉफ और शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो जाए।

सूत्रों की मानें तो देहरादून के जिलाधिकारी चंद्रेश यादव ने डाकपत्थर में एक सरकारी बिल्डिंग की तलाश कर ली है जिसमें कॉलेज खोला जा सकता है। देहरादून और हल्द्वानी में डिग्री कॉलेजों में दाखिले के लिए सर्वाधिक मारामारी रहती है।
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जिलाधिकारियों की देखरेख में ऐसे निकलेगा समाधान

1. अधिक छात्र संख्या वोले राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों के साथ तत्काल बैठक कर पिछले वर्ष को आधार मानते हुए 2014 में स्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए अनुमानित छात्र संख्या पता करनी होगी।
2. जिन राजकीय महाविद्यालयों में कोई भवन निर्माणाधीन है उनको वर्तमान संरचना में शामिल मानते हुए सीट वृद्घि का प्रस्ताव संबंधित विश्वविद्यालय को प्रेषित कराना होगा।
3. अधिक छात्र संख्या वाले राजकीय महाविद्यालयों के आसपास किसी सरकारी भवन या परिसर को अधिग्रहण कर प्राचार्य को हस्तांतरित कर बढ़ी हुई संरचना के दृष्टिगत विश्वविद्यलाय को सीट बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव भिजवाएं।
4. महाविद्यालयों मे सांध्यकालीन कक्षाओं को स्ववित्त पोषित केस्थान पर राज्य वित्त पोषित किया जाना विचाराधीन है। इसलिए राज्य वित्त पोषित सांध्यकालीन कक्षाओं के लिए विश्वविद्यालय से सीट निर्धारण का प्रस्ताव भी प्रेषित कराया जाएगा।
5. निदेशालय एवं शासन से समन्वय के लिए जिलाधिकारी कार्यालय में एक नोडल अधिकारी नियुक्त कर टेलीफोन और फैक्स नम्बर शासन को प्रेषित करना होगा।

अनुमन्य छात्र संख्या और वास्तविक संख्या के बीच अंतर भरने के लिए बहुआयामी प्रयासों की आवश्यकता है। जिसमें जिलाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। जिलाधिकारियों को विशेष बिंदुओं पर तत्काल कार्यवाही करने को कहा गया है। ताकि 11 अगस्त शाम तक जिलाधिकारी ढांचागत सुविधाओं पर अपनी रिपोर्ट शासन को प्रेषित कर दें। कॉलेज में सीट वृद्घि को लेकर प्राचार्यों को विश्वविद्यालय को सोमवार तक प्रस्तावित संख्या भेजकर शासन को भी प्रेषित करनी है।
-मनीषा पंवार, प्रमुख सचिव
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