देहरादून में सरकारी जमीनों, नालों पर कब्जे कर बसी बस्तियों के मामले में नगर निगम की दोहरी चाल सवालों के घेरे में है।
ढहा दिए 12 परिवारों के मकान
एक ओर कई बार नोटिस दिए जाने के बाद भी नगर निगम ब्रह्मावाला खाला में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई से कतरा रहा है, वहीं काठबंगला बस्ती में बिना पूर्व सूचना जेसीबी चला दी गई। 12 परिवारों को घरों से निकाल मकान ढहा दिए गए।
बच्चों को गोद में लिए महिलाओं की सर्द मौसम में आशियाना न छीनने और कुछ वक्त देने की गुहार का भी टीम पर कोई असर नहीं हुआ। इस दौरान घरों में रखा सामान तोड़ने के आरोप पर बस्तीवासियों और पुलिसकर्मियों के बीच धक्कामुक्की भी हुई। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर लोगों को खदेड़ दिया।
राजपुर क्षेत्र स्थित काठबंगला बस्ती में नगर निगम की टीम दोपहर एक बजे राजपुर पुलिस को साथ लेकर पहुंची। उस वक्त यहां बने 12 घरों में रहने वाले मजदूरों के परिवार खाना बना रहे थे। निगम की जेसीबी ने पहुंचते ही इन घरों को ढहाना शुरू कर दिया।
हक्के-बक्के मजदूर, महिलाएं, बच्चे बाहर दौड़े और कार्रवाई रोकने की गुहार लगाई। लेकिन टीम नहीं रुकी। उमेश पाल, धर्म सिंह, संजय, विकास, जन बहादुर सहित 12 परिवारों के कब्जे तोड़ डाले। इस दौरान कई महिलाओं की पुलिस कर्मियों के साथ धक्का मुक्की भी हुई। पीड़ित उमेश पाल ने बताया कि नगर निगम को नोटिस देना चाहिए था।
ब्रह्मावाला में भी यही फार्मूला!
निगम पर उठ रहे सवालों के बीच सूत्रों का कहना है कि ब्रह्मावाला खाला बस्ती में भी निगम काठबंगला की तरह अचानक धावा बोल सकता है। दरअसल, ब्रह्मावाला खाले में बने अवैध घरों को न ढहाने का राजनेताओं की ओर से भारी दबाव रहता है।
निगम की कार्रवाई शुरू होते ही कई नेता मौके पर जुट जाते हैं। कुछ समय पूर्व नोटिस जारी होते ही बस्तीवासियों ने निगम पर सियासी दबाव बना दिया था। सूत्रों का कहना है कि इस बार निगम नोटिस देने में नहीं उलझेगा। इसके बजाय कभी भी सीधे जेसीबी ले जाकर अवैध मकान ढहा दिए जाएंगे।
अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण के लिए नोटिस देने की कोई जरूरत नहीं होती है। इसीलिए काठ बंगला में सीधे कार्रवाई की गई। हालांकि वहां बसे लोगों को पहले ही टीम ने चेता दिया था कि वो अवैध कब्जा करने से बाज आएं।
- हरक सिंह रावत, मुख्य नगर अधिकारी