नाबालिग के अपहरण और यौन उत्पीड़न के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीएससी/पॉक्सो) अब्दुल कय्यूम की अदालत ने आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा और पर्याप्त ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके।
मामला सेलाकुई थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के मुताबिक, दो नवंबर 2022 को एक महिला ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि उसकी 15 वर्षीय बेटी घर से लापता हो गई है। पुलिस की विवेचना में चमोली जिले के थराली (ग्राम जूनीधार) निवासी अनिल कुमार पर किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने और यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ अपहरण व पॉक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।
गवाहों के बयानों में मिला भारी विरोधाभास
सुनवाई के दौरान मामले में तब नया मोड़ आ गया, जब पीड़िता ने अदालत में अपने बयान दर्ज कराए। उसने आरोपी की ओर से किसी भी गलत काम से साफ इनकार करते हुए बताया कि वह अपनी मर्जी से अपनी मामी के घर गई थी और दो-तीन दिन बाद खुद लौट आई। पीड़िता की मां ने भी गवाही दी कि डांट पड़ने पर बेटी बिना बताए चली गई थी। वहीं, चिकित्सीय परीक्षण में भी पीड़िता के शरीर पर किसी प्रकार की चोट या दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई।
अदालत की टिप्पणी
न्यायालय ने स्कूल के एसआर रजिस्टर के आधार पर यह तो माना कि घटना के वक्त पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम थी, लेकिन अपहरण या जबरन ले जाने के आरोप प्रमाणित नहीं हो सके। गवाहों के बयानों में विरोधाभास, चिकित्सीय साक्ष्यों के अभाव और बरामदगी से जुड़े ठोस दस्तावेजों की कमी को देखते हुए अदालत ने आरोपी अनिल कुमार को बाइज्जत बरी कर दिया।