इस बीमारी में मरीज के मस्तिष्क का फ्रंटल कॉर्टेक्स सर्किट खराब हो जाता है। यह बीमारी आमतौर पर बच्चों में देखने को मिलती हैं। इसमें बच्चे बिना किसी कारण के गाली देने लगते हैं और अजीब व्यवहार करते हैं। डॉ. गुप्ता ने बताया कि वैसे तो इनकी क्लीनिकल जांच में ही पुष्टि हो जाती है लेकिन कई बार इसकी पहचान के लिए मस्तिष्क की एमआरआई और सीटी स्कैन समेत कई जांचें करवानी पड़ती हैं। चिकित्सक का कहना है कि अभी तक इस बीमारी के पीछे किसी भी तरह के भौतिक कारण सामने नहीं आए हैं।
ग्रसित लोगों के आत्मविश्वास में आ रही कमी
जिला चिकित्सालय की वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. निशा सिंगला ने बताया कि टॉरेट एक ऐसी बीमारी है, जो इससे पीड़ित लोगों में आत्मविश्वास कम कर रहा है। इसकी चपेट में आने वाले लोग किसी भी तरह की चिंता और अन्य कारणों से गालियां दे देते हैं, बाद में उन्हें अफसोस भी होता है। यह व्यवहार उनके नियंत्रण में नहीं होता है। उनका कहना है कि उनके पास जो मरीज आते हैं, वे कहते हैं कि उन्हें नहीं पता कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं।