केंद्र की बेटियों के सुरक्षित भविष्य के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की घोषणा से गिरते बाल लिंगानुपात वाले राज्य उत्तराखंड की उम्मीद बढ़ी है।
राज्य के सामाजिक आर्थिक परिवेश में महिलाओं की पुरुषों से अधिक भागीदारी के बावजूद कोख में कन्याओं का कत्ल चिंताजनक है।
पिथौरागढ़ देश में सर्वाधिक कम बाल लिंगानुपात वाला जिला है, जहां एक हजार बालकों पर 766 बालिकाओं का जन्म दर्ज किया जा रहा है। ऐसे स्थिति में केंद्र की इस योजना का फोकस उत्तराखंड में रहेगा।
योजना से हालात बदलने की आस
बेटियों के लिए केंद्र की चिंता का फायदा उत्तराखंड को मिल सकता है। राज्य में 13 बरसों में बाल लिंगानुपात 99 अंक गिरा है। वर्ष 2001 में बाल लिंगानुपात (0-6 वर्ष) 967 था जो वर्ष 2013 में घटकर 866 रह गया है।
ऐसे में केंद्र की बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना उत्तराखंड के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण है। स्कूल पाठ्यक्रम में एक चैप्टर शामिल करने की बात वित्त मंत्री कह चुके हैं।
इसके अलावा उम्मीद है कि बालिकाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए स्वास्थ्य, समाज कल्याण, बाल एवं महिला कल्याण में केंद्र की मदद से नई योजनाएं राज्य को मिल सकती है। लिंगानुपात को सुधारने के लिए कड़े फैसलों का प्रावधान रहेगा।
उत्तराखंड में बढ़ी कन्याभ्रूण हत्या
जनपद----- 2001 ---- 2011
पिथोरागढ़--- 902 ------ 766
पौड़ी--------- 930 ----- 899
टिहरी------- 927 ------ 888
रुद्रप्रयाग---- 953 ------ 899
देहरादून----- 894 ------ 890
चमोली ----- 935 ------ 889
हरिद्वार ----- 862 ------ 869
उत्तरकाशी--- 942 ------- 915
चंपावत----- 934 ------- 870
नैनीताल---- 910 ------- 891
बागेश्वर----- 930 ------- 901
यूएसनगर--- 913 ------- 896
अल्मोड़ा----- 933 ------ 921