देहरादून में कहीं आधार कार्ड बिल्कुल मुफ्त बन रहा है, तो कहीं हर बात पर वसूली की जा रही है। कुछ कंपनियों के खिलाफ शिकायत मिलने पर एडीएम वित्त प्रताप सिंह शाह ने तहसीलदार को जांच के आदेश दिए हैं।
आधार कार्ड बना कमाई का जरिया
आधार कार्ड बनाने का ठेका लेने वाली कुछ कंपनियों ने खुद शिविर लगाने के बजाय यह काम एनजीओ और फर्मों को आउट सोर्सिंग पर दे दिया है। लेकिन, इन संस्थाओं ने आधार कार्ड को कमाई का जरिया बन लिया है।
हालत यह है कि मुफ्त में मिलने वाला फार्म 10 रुपए में बेचा जा रहा है। दूसरी औपचारिकताओं के लिए भी वसूली की जा रही है। यह सब दिनदहाड़े हो रहा है लेकिन प्रशासन को विरंची और कारवी को छोड़कर आउटसोर्सिंग पर काम कराने वाली दूसरी कंपनियों के संबंध में कुछ पता नहीं है।
नेकटॉन कंपनी ने माजरा और क्लेमेंटाउन में फ्रेंचाइजी दे रखी है। माजरा में सीएमसी को फ्रेंचाइजी दी गई है। यहां शिविर में बैठे लोगों ने बताया कि वे आधार कार्ड बनवाने के लिए फार्म मुफ्त देते हैं। लेकिन ऑनलाइन आधार चेक करने के लिए 15 रुपये लेते हैं।
वेबसाइट से आधार कार्ड डाउनलोड करने और इसके प्रिंट के लिए 50 रुपए लिए जा रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि इसमें से 10 रुपए सरकार को जाते हैं। इसके अलावा विभिन्न मोहल्लों में अलग-अलग शिविर लगे हुए हैं। प्रशासन को इनकी जानकारी नहीं है। एडीएम वित्त शाह ने बताया कि एक जगह से शिकायत आई थी। तहसीलदार को जांच दे दी गई है।
खुलेआम फार्मों की बिक्री
जहां-जहां नेकटॉन कंपनी ने फ्रेंचाइजी दे रखी हैं, वहां बाहर सड़कों पर आधार कार्ड के फार्म बेचे जा रहे हैं। जैसा ग्राहक फंसा वैसी कीमत वसूली जा रही है। क्लेमेंटटाउन में 10 रुपए, जबकि माजरा सेंटर के बाहर सड़क पर फार्म पांच रुपए में बेचे जा रहे थे। लोगों ने बताया कि इसकी शिकायत प्रशासन के अधिकारियों से भी की है।