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Mother's day: कूड़ा बीनने और भीख मांगने वाले बच्चों की मसीहा है ये मां

Sun, 14 May 2017 10:34 AM IST
भास्कर पोखरियाल/ अमर उजाला, रुद्रपुर
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अपनी कोख से जन्मे बच्चों को यूं तो मां अपने जिगर का हिस्सा मानती है और उनके सुनहरे भविष्य को संवारती हैं, लेकिन यहां एक मां ऐसी भी है जो अपने बच्चों से भी ज्यादा गरीब बच्चों के लिए समय देती हैं।
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सड़क पर कूड़ा बीनने और भीख मांगने वाले 22 बच्चों की परवरिश संजय नगर प्रथम के राजकीय प्राथमिक विद्यालय की सहायक अध्यापिका गायत्री पांडे कर रही हैं।

वह इन बच्चों को स्कूल में पढ़ाती हैं और स्कूल समय के बाद भी तीन से चार घंटे इन गरीब बच्चों के बीच में अपनी ममता का दुलार भी इन्हें देती हैं। अब यह बच्चे गायत्री पांडे को अपनी गुरु मां मानते हैं।

एक जनवरी 2016 को हुई थी एक घटना

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एक जनवरी 2016 का दिन गायत्री पांडे के लिए एक प्रेरणा बन गया, जब ऊधमसिंह नगर के तत्कालीन डीएम (दिवंगत) अक्षत गुप्ता ने मिशन आगाज के तहत गरीब और कूड़ा बीनने वाले बच्चों को सड़क से उठाकर उन्हें सरकारी स्कूल में पढ़ाने का अभियान छेड़ा था।

इसकी शुरुआत भी राजकीय प्राथमिक विद्यालय प्रथम संजय नगर से शुरू की। बस फिर क्या था स्कूल की सहायक अध्यापिका गायत्री पांडे को यह अभियान भा गया। उन्होंने इसे अपने अभियान में शामिल कर लिया। इसके बाद गायत्री ने 29 बच्चों को सड़क से स्कूल ले जाकर उन्हें शिक्षा के साथ ही ममता का प्यार दिया।

बच्चे भी गायत्री को अपनी मां मानने लगे। बच्चों में छिपी प्रतिभा जैसे-जैसे निखरने लगी तो गायत्री का भी सपना अब इन बच्चों को बेहतर भविष्य के साथ संवारना बन गया है। 29 बच्चों में सात बच्चे तो अपने माता-पिता के साथ रोजगार की तलाश में यहां से चले गए, लेकिन 22 बच्चे जिनमें 7 लड़के और 15 लड़कियां शामिल हैं, इसी स्कूल में गायत्री की ममता और शिक्षा में रम गए।

ये बच्चे अग्रेजी बोलना भी सीख रहे हैं। गायत्री अपने वेतन से इन बच्चों के कापी-किताब और ड्रेस भी खरीदती हैं। गायत्री पांडे ने बताया कि उनके दो बेटे हैं, एक बीटेक कर रहा है जबकि दूसरा बेटा 12वीं में पढ़ रहा है।
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पीएसी की सेनानायक भी बच्चों को देती हैं ममता

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संजय नगर के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे कूड़ा बीनने वाले बच्चों के बीच अपने दिवंगत आईएएस पति अक्षत गुप्ता के मिशन आगाज के तहत अपने दिवंगत पति के सपने को साकार करने के लिए 31वीं वाहिनी पीएसी की सेनानायक आईपीएस अधिकारी रिद्धिम अग्रवाल समय-समय पर यहां आती हैं और इन बच्चों के बीच कुछ पल बिताते हुए उन्हें अपनी ममता से भी दुलारती हैं।

आईपीएस रिद्धिम अग्रवाल ने हाल ही में इन बच्चों को लाने और ले जाने के लिए एक चौपहिया वाहन की भी व्यवस्था करा दी है। अब ये बच्चे भी कान्वेट स्कूलों के बच्चों की तरह गाड़ी से स्कूल आते हैं और जाते हैं।             

दिब्यांग बबलू का सपना अब सड़क पर कूड़ा बीन कर रुपये कमाना नहीं बल्कि वह पायलेट बनना चाहता है। उसे आसमान में हवाई जहाज को उड़ाने की तमन्ना है।

इसीलिए वह अब अपनी गुरु मां के साथ खूब पढ़ाई करना चाहता है। छात्र वसीम और छात्रा शाजिया डाक्टर बनना चाहती हैं। फिजा भी डाक्टर बनकर गरीबों की सेवा करने का सपना संजोए है। रुखसाना का सपना पुलिस अफसर बनना है। 
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