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I पिछले चार महीने में देहरादून जिले के विभिन्न अस्पतालों में 86 जच्चा-बच्चा की मौत हुई है। समीक्षा बैठक के दौरान यह बात सामने आई तो मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने इनके कारणों की समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को चेताते हुए कहा कि जच्चा-बच्चा सुरक्षित रहे इसके लिए तमाम कार्यक्रम चलाए जा रहे है लेकिन उसके बाद भी ये मृत्यु चिंताजनक है।I
Iसीडीओ अभिनव शाह बुधवार को देहरादून में मातृ एवं शिशु मृत्यु की त्रैमासिक बैठक ले रहे थे। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग ने जिसमें 18 मातृ मृत्यु व 63 शिशु मृत्यु के प्रकरणों की समीक्षा की गई। अप्रैल से जुलाई के दौरान देहरादून जिले में जच्चा-बच्चा की मौत के आंकड़े जब सीडीओ के सामने पहुंचे तो मात्र चार महीने में 86 मौत देखकर वह भौचक्के रह गए। रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल से लेकर जुलाई महीने में देहरादून जिले के विभिन्न अस्पतालों में ये मौत हुई हैं। समीक्षा के दौरान सीडीओ ने जहां ये मौतें हुई हैं उन सरकारी व निजी चिकित्सालयों, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, एएनएम व आशा कार्यकर्ताओं से जानकारी ली।I
Iइस दौरान यह भी विश्लेषण किया गया कि मौत के बाद प्रभावित परिवारों के समक्ष संबंधित अस्पताल प्रबंधन ने मृत्यु के कारणों का क्या उल्लेख किया है। सीडीओ ने कहा कि एएनसी से लेकर संस्थागत प्रसव और गृह आधारित नवजात देखभाल (एचबीएनसी) भ्रमण तक गर्भवती महिला एवं नवजात शिशु की निरंतर देख-रेख व निगरानी हो। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि प्रत्येक परिस्थिति में यह सुनिश्चित किया जाए की गर्भवती महिला एवं शिशु को मातृ-शिशु सेवाओं का पूरा लाभ मिले और यदि इन मामलों में किसी भी स्तर पर कोई भी लापरवाही बरती जाती है कठोर कार्रवाई की जाए।
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Iसीएमओ डा. मनोज कुमार शर्मा ने सीडीओ को बताया कि जिला स्तर पर लगातार मातृ एवं शिशु मृत्यु की समीक्षा की जा रही है। सभी चिकित्साधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि गर्भवती महिला एवं नवजात शिशु का उपचार सर्वाेच्च प्राथमिकता पर किया जाए। एसीएमओ एनएचएम डा. निधि रावत, चिकित्सा अधीक्षक डा. केएस भंडारी, डा. प्रताप सिंह रावत, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डा. विक्रम सिंह आदि मौजूद मौजूद रहे।I
I18 मृत्यु में छह मत्यु एम्स ऋषिकेश मेंI
Iमातृ मत्यु के मामले में अभी तक एम्स ऋषिकेश का बुरा हाल है। जिले में कुल 18 मातृ पिछले चार महीने में मातृ मृत्यु के मामले सामने आए हैं। इनमें अकेले एम्स ऋषिकेश में छह मामले हैं। जबकि दो मौत दून अस्पताल में हुई हैं। जबकि बाकी मौत अन्य अस्पतालों में हुई। इनमें 18 में 12 महिलाएं उत्तराखंड और बाकी छह महिलाएं अन्य प्रदेशों की थी।
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Iदेहरादून जिले की मातृ-शिशु मृत्यु दर की समीक्षा की गई। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जो मृत्यु हुई हैं। उनकी समीक्षा की गई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि मातृ-शिशु मृत्यु की दर को कम किया जाए। जहां जिस स्तर पर लापरवाही बरती जाए उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
-अभिनव शाह, सीडीओI