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ड्रिप सिंचाई सुविधा के लिए राज्य सरकार देगी सब्सिडी

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ड्रिप सिंचाई सुविधा के लिए राज्य सरकार देगी सब्सिडी
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। प्रदेश के किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों के साथ मंथन किया। किसानों को बीज, खाद व सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने पर विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि ड्रिप सिंचाई सुविधा के लिए प्रदेश सरकार भी किसानों को 25 प्रतिशत सब्सिडी देने पर जल्द फैसला लेगी। अभी तक केंद्र सरकार की ओर से ही ड्रिप सिंचाई पर 55 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। जबकि 45 प्रतिशत राशि किसानों को देनी पड़ रही है।
कार्यशाला में पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति डा. एके मिश्रा समेत अन्य विशेषज्ञों ने बीज की गुणवत्ता, रसायनिक खादों का इस्तेमाल, मार्केटिंग की व्यवस्था पर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। इससे प्रदेश में कृषि पैदावार बढ़ाने के साथ ही किसानों की आमदनी बढ़ सके। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि अभी तक राज्य में बीज की डिमांड के लिए प्रबंधन सही नहीं है। क्षेत्र के हिसाब से बीज की डिमांड ब्लाक व जिला से राज्य स्तर पर भेजी जाए और किस क्षेत्र में कौन-सा बीज किसानों को उपलब्ध कराया जाए। बीज का सही चयन न होने से फसलों में कई तरह की बीमारियां पनप रही है। इस कारण किसान अंधाधुंध रसायनिक दवाइयों का प्रयोग कर रहा है। इससे राज्य में औद्यानिकी फसलों को सालाना 400 से 500 करोड़ का नुकसान हो रहा है। पिछले पांच सालों में वेजिटेवल क्राप्स में पेस्टी साइड का इस्तेमाल बढ़ा है। रसायनिक दवाइयां बेचने वाले डीलरों को प्रशिक्षण दिया जाए।
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कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि किसानों पर समय पर बीज व खाद उपलब्ध कराने के लिए अधिकारी पहले से ही तैयारी करें। विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ उन्नत बीज तैयार कर किसानों को तकनीक जानकारी भी दें। उन्होंने कहा कि केंद्रीय स्कीम का पैसा लैप्स होने पर संबंधित विभाग के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। किसी भी हालत में केंद्र का पैसा वापस नहीं जाना चाहिए। सचिव कृषि डी. सेंथिल पांडियन ने कहा कि कृषि और औद्यानिकी के क्षेत्र में सेक्टरवार विशेषज्ञ समितियों का गठन कर प्रारंभिक रोडमैप तैयार किया जा रहा है। इससे मधुमक्खी पालन, आर्गेनिक फार्मिंग, मृदा परीक्षण एवं प्रबंधन, कृषि विपणन, फल, सब्जी, मशरूम उत्पादन, कोल्ड स्टोरेज चेन, पोस्ट हारवेस्टिंग, मैनेजमेंट, भेड़ एवं बकरी पालन, मत्स्य पालन आदि को शामिल किया गया। किसानों के छोटे-बड़े समूह कंपनी बनाकर बिजनेस मॉडल बनाने की योजना बनाई जाएगी।
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इन मुद्दों पर बनीं रणनीति
-उन्नत बीज तैयार करना व समय पर किसानों को उपलब्ध करना।
-रसायनिक खादों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करना।
-औद्यानिकी फसलों की पैदावार करने वाले किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड देना।
-फसलों की खेती के लिए वाटर हारवेस्टिंग व सूक्ष्य सिंचाई योजना।
-भौगोलिक परिस्थिति व जलवायु के अनुसार किसानों को बीज देना।
-प्रत्येक कलस्टर पर फार्मर मशीन बैंक की सुविधा।

इन विभागों ने प्रस्तुत की कार्य योजना
कार्यशाला में पंतनगर विश्वविद्यालय, औद्यानिकी विश्वविद्यालय भरसार, विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा, कृषि विभाग, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य विभाग, जड़ी-बूटी शोध संस्थान, मशरूम प्रशिक्षण केंद्र, ग्राम्य विकास समिति, रेशम, राजकीय मौन पालन केंद्र ज्योलीकोट, सगंध पौधा केंद्र आदि विभागों ने कार्य योजना को प्रस्तुति किया।
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