कालागढ़ क्षेत्र में 49 वर्ष मंदिर में रहकर प्रकृति की सेवा और भगवान की भक्ति में रम गए बाबा हनुमान गिरी की 73 इंच की शिखा श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी है।
तस्वीरों में देखिए, 'पाताल' में भारत का एक मतदान केंद्र
मूल रूप से कासगंज क्षेत्र में जन्मे बाबा हनुमान गिरी 1965 से कालागढ़ के निकट बीहड़ जंगलों में स्थित नूनगढ़ के मंदिर में सेवा कर रहे हैं।
प्रकृति की गोद में पाते हैं सुख
बाबा का कहना है कि प्रकृति की गोद में और भगवान की भक्ति में वह सुख पाते हैं। जंगल के अंदर स्थित मंदिर में 25-30 वर्ष से वह अकेले ही रह रहे हैं।
बाघ, हाथी, गुलदार जैसे खतरनाक जीवों से नूनगढ़ का मंदिर घिरा हुआ है। कई बार तो जंगली जानवर उनके सामने ही मंदिर में आ जाते हैं।
ये है शिखा का राज
अपने लंबी शिखा के बारे में वह बताते हैं कि जंगल में रहकर इसे पानी और आंवला के फलों के रस से भी इसे धोते हैं। तपस्या और भक्ति से कुछ भी संभव है।
बाबा हनुमान गिरी इन दिनों कालागढ़ में नई कालोनी में राजबहादुर भटनागर के निवास पर आए हैं। जहां उनकी शिखा को देखने और आशीर्वाद लेने के लिए श्रृद्धालुओं का तांता लगा है।