उत्तराखंड प्रदेश का पुलिस महकमा कर्ज के बोझ से दबा हुआ है। उत्तराखंड पुलिस को 60 करोड़ रुपए का कर्ज चुकता करना है।
चुनाव सहित अन्य ड्यूटियों के लिए अब तक बुलाई गई विभिन्न राज्यों की पुलिस और केंद्रीय पुलिस बल का 60 करोड़ 42 लाख 35 हजार 310 रुपए उत्तराखंड पुलिस ने देना है। इसी तरह इन सबसे 24 करोड़ 41 लाख 96 हजार 198 रुपए पुलिस को लेने हैं।
हल्द्वानी निवासी आरटीआई कार्यकर्ता गुरविंदर चड्ढा की आरटीआई में ये आंकड़े सामने आए हैं। आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा 34 करोड़ 78 लाख 82 हजार 988 रुपए सीआरपीएफ की देनदारी है। इसके बाद यूपी की, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और मध्य प्रदेश की देनदारी उत्तराखंड पुलिस पर है।
करीब साढ़े 11 करोड़ रुपए उत्तर रेलवे से लेने हैं। जबकि छत्तीसगढ़, हरियाणा, बिहार, गोवा, गुजरात, यूपी, राजस्थान, एमपी, पूर्वोत्तर रेलवे, उत्तर रेलवे और भारत सरकार पर आईआरबी की लेनदारी है। आरटीआई में ये भी बताया गया है कि इसमें से किसी भी राशि पर ब्याज का कोई प्रावधान नहीं है।
रिपोर्ट पर पुलिस मुख्यालय की कुंडली
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून
हल्द्वानी में मुख्यमंत्री हरीश रावत के वाहन पर हुए हमले के मामले में पुलिस चूक की जांच रिपोर्ट पर पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) कुंडली मारकर बैठ गया है। अपर महानिदेशक (प्रशासन) अनिल रतूड़ी बीस दिन पहले जांच रिपोर्ट सौंप चुके हैं, लेकिन मुख्यालय इसे रोके रखने का अजब तर्क दे रहा है।
पुलिस महानिदेशक का कहना है कि शासन की रिपोर्ट मिलने के बाद ही पुलिस की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी। ऐसे में पुलिस की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं। माना जा रहा है कि शासन की रिपोर्ट में कुछ ऊंच-नीच हुई तो पुलिस अपनी रिपोर्ट में इसे ‘मैनेज’ करने की कोशिश करेगी।
28 नवंबर को लाडली दुराचार और हत्या मामले में जानकारी लेने हल्द्वानी गए मुख्यमंत्री हरीश रावत के वाहन पर हमला और पथराव किया गया था। घटना से पुलिस के सुरक्षा प्रबंधों पर सवाल उठ गए थे। शासन ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शैलेश बगोली को जांच सौंपी।
दूसरी ओर, पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू ने अपर महानिदेशक अनिल रतूड़ी को अलग से जांच के लिए कहा। बगोली दिसंबर में अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप चुके हैं। हालांकि शासन स्तर पर भी इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
उधर, रतूड़ी ने भी बीस दिन पहले पुलिस चूक को लेकर रिपोर्ट डीजीपी को सौंप दी।
बताया जा रहा है कि पुलिस मुख्यालय ने शासन से बगोली की जांच रिपोर्ट की प्रति मांगी थी, लेकिन वह नहीं मिली है। ऐसे में अपनी रिपोर्ट आने के बावजूद पुलिस अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि मामले में लीपापोती की तैयारी है।
शासन की रिपोर्ट की प्रति नहीं मिलने के कारण पुलिस जांच रिपोर्ट से इसका मिलान नहीं हो सका है। इस वजह से विलंब हो रहा है। मुख्यमंत्री सुरक्षा से जुड़ा यह गंभीर मामला है। दोनों रिपोर्ट के तथ्यों के आधार पर कार्रवाई के साथ पुनरावृत्ति टालने के लिए संयुक्त रणनीति बनाने की योजना है।
- बीएस सिद्धू, पुलिस महानिदेशक