कोरोनाकाल में डीआरडीओ की ओर से ऋषिकेश में बनाए गए 500 बेड के कोविड केयर सेंटर (अस्थायी अस्पताल) को बंद कर दिया गया है। यहां के कुछ चिकित्सीय उपकरण और अन्य सामान एम्स ऋषिकेश ने खरीद लिए हैं जबकि बाकी सामान रायपुर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में शिफ्ट किया गया है। यह सामान विभिन्न सरकारी अस्पतालों में भेजा जाएगा।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में बड़ी संख्या में कोविड मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ी थी। अस्पतालों में भी ज्यादातर मरीजों को आईसीयू और वेंटिलेटर तक पर रखने की नौबत आई थी। अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन और अन्य संसाधन कम पड़ने पर जिले में कुछ बड़े कोविड केयर सेंटर खोले गए थे। केंद्र सरकार के निर्देश पर डीआरडीओ की ओर से आईडीपीएल में शहीद जसवंत सिंह रावत के नाम पर 500 बेड का अस्थायी कोविड अस्पताल बनाया गया था। इसका उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने किया था। इसमें 150 आईसीयू बेड की भी सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। कोविड केयर सेंटर के संचालन का जिम्मा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश को सौंपा गया था। यहां तैनात मेडिकल स्टाफ का वेतन राज्य सरकार की ओर से दिया जा रहा था।
अब जबकि कोरोना मरीजों की संख्या बहुत कम हो चुकी है और तीसरी लहर मेें भी अधिकतर मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ी, ऐसे में कोविड केयर सेंटर बंद किए जा रहे हैं। इसी क्रम में डीआरडीओ की ओर से बनाया गया अस्थायी अस्पताल भी बंद कर दिया गया है। यहां काम करने के लिए अस्थायी तौर पर रखे गए नर्सिंग ऑफिसर, लैब टेक्नीशियन और हाउस कीपिंग स्टाफ की सेवाएं भी समाप्त हो चुकी हैं। ऊर्जा निगम की ओर से बिजली और जल संस्थान की ओर से पानी का कनेक्शन काट दिया गया था।
डीआरडीओ की ओर से बनाया गया अस्थायी अस्पताल बंद कर दिया गया है। कुछ सामान एम्स ऋषिकेश ने खरीदे हैं। कुछ महाराणा प्रताप अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के कोविड केयर सेंटर में रखे गए हैं। कोरोना की चौथी लहर की आशंका को देखते हुए क्रिकेट स्टेडियम के कोविड केयर सेंटर को फिलहाल तैयार रखा गया है। जरूरत पड़ने इस सेंटर को खोलकर कर्मचारियों को ड्यूटी पर रखा जाएगा और अन्य जरूरी सामान भी भेजे जाएंगे।
-डॉ. मनोज उप्रेती, मुख्य चिकित्सा अधिकारी