साहब! अनुदान का चेक दे दो
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। साहब! बेटे के इलाज के लिए तहसील से मदद के रुपयों का चेक नहीं मिल रहा है, जबकि सरकार से मदद के रुपये जारी हो चुके हैं। एक साल से अधिक हो गया यहां के चक्कर काटते हुए लेकिन कर्मचारी हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर टरका देते हैं। पैसे न होने के कारण बेटे का इलाज नहीं हो पा रहा है। यह व्यथा सुनाते सुनाते महिला रोने लगी। यह मात्र एक बानगी है सरकारी कार्यालयों में धक्के खाने वाले लोगों की। राज्य सरकार सभी योजनाओं में जीरो टालरेंस के तमाम दावे कर रही है लेकिन प्रशासनिक मशीनरी उन दावों को धता बता रही, जिससे योजनाओं का लाभ लेने वाले पात्र सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं।
सोमवार को तहसील पहुंची डालनवाला निवासी मधु तहसीलदार के आगे गिड़गिड़ाने लगीं। बोलीं साहब! - वह एक साल साल से यहां के चक्कर लगा रही है। हर बार उसे इधर उधर भेज दिया जाता है। कोई उसकी गुहार सुनने को तैयार नहीं है। घर मेें बेटा बीमार हैं। पैसे न होने के कारण वह उसका इलाज नहीं करा पर रही है। आज उसे भाजपा कार्यालय से पता चला है उनकी मदद का चेक तहसील में भेज दिया गया है। यहां पहुंचने पर कर्मचारी बोल रहे हैं कि चेक यहां नहीं है। इस पर तहसीलदार मुकेश चंद्र रमोला ने संबंधित कर्मचारी को बुलाकर जल्द चेक दिलाने का आश्वासन दिया।
मधु ने बताया कि उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। उसके बेटे को पथरी की बीमारी है, जिसका वह इलाज कराने में सक्षम नहीं है। डेढ़ साल पहले बेटे के इलाज के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से धनराशि लेने के लिए आवेदन किया था। जब वह पात्र पाई गई तो 40 हजार रुपये की अनुदान राशि जारी की गई। जो जिसका चेक अभी तक नहीं मिल पाया है।