ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश । देव गुरु बृहस्पति 13 महीने बाद यानी 11 अक्टूबर को सांय काल तुला राशि को छोड़कर मित्र मंगल की वृश्चिक राशि पर गोचर भ्रमण शुरू करेंगे। इस खगोलीय घटना से पृथ्वी लोक पर जनमानस के साथ ही प्रकृति में भी अप्रिय घटनाओं की संभावना है। यह आकलन ज्योतिष डॉ. चंडीप्रसाद घिल्डियाल का है। नवग्रहों में बृृहस्पति देवताओं के भी गुरु हैं। ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति का चंद्र राशि से 2,5,7,9 व 11वें भाव में गोचर भ्रमण अत्यंत शुभ माना जाता है।
11 अक्तूबर रात्रि आठ बजकर 29 मिनट पर बृहस्पति वृश्चिक राशि में आएंगे। वृश्चिक राशि काल पुरुष की अष्टम भाव वाली राशि है। इससे दुनिया में रोग बढ़ेंगे। अगले साल दस अप्रैल से 11 अगस्त 2019 तक गुरु की वक्र स्थिति से देश में प्राकृतिक आपदाएं व आतंकवाद बढ़ सकता है। देश में राजनीतिक अस्थिरता का वातावरण बन सकता है। आम चुनावों को लेकर जनता में उत्साहहीन भाव दिख सकता है। ग्रहों की चाल बताती है कि किसी बडे़े राजनेता को नुकसान भी हो सकता है।
स्वतंत्र भारत की कुंडली में सप्तम व चंद्रकुंडली से पंचम भाव में बृहस्पति के गोचर भ्रमण से आध्यात्मिक व धार्मिक उत्थान, तीसरे पराक्रम भाव पर दृष्टि से पड़ोसी देशों से अच्छे संबंध, विदेशों में मान सम्मान, सरकारी राजकोष में वृद्धि, व्यापार व अर्थ व्यवस्था में सुधार होगा। नवरात्र में बृहस्पति राशि परिवर्तन संतान प्राप्ति, राज्य लाभ के लिए देवी पूजन बहुत शुभ रहेगा।
बृहस्पति की चाल परिवर्तन से राशियों पर प्रभाव -
मेष - सुख सायन, रोगों की उत्पत्ति
वृष - तीर्थाटन, धार्मिक यश लाभ
मिथुन - स्वास्थ्य हानि
कर्क - सर्वत्र विजय, सुख उपभोग
कन्या - रोजगार हानि
तुला - धनलाभ
वृश्चिक - स्वास्थ्य हानि
धनु - व्यापार वृद्धि
मकर - पराक्रम लाभ
कुंभ - राज्य लाभ
मीन - सभी प्रकार के लाभ