जून में आई आपदा के बाद रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ के करीब 300 गांवों को विस्थापित किया जाना है।
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इन गांवों को दूसरी जगह बसाने के लिए जमीन चिह्नित करने की जिम्मेदारी प्रभारी वन अधिकारी (डीएफओ) और संबंधित जिलाधिकारियों को दी गई थी। लेकिन दोनों अफसर मामले में अभी तक एक कदम भी आगे नहीं बढ़े हैं।
तीन सौ गांव के लोग हैं परेशान
इन अफसरों की सुस्ती का खामियाजा तीन सौ गांवों के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सरकार ने रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ के लगभग 300 गांवों को विस्थापित करने के लिए शासन, प्रशासन और जंगलात महकमे को निर्देश दिया था।
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सबसे अहम भूमिका जिला प्रशासन और जंगलात महकमे की थी, क्योंकि सिविल सोयम और वन पंचायतों की जमीनों पर इन गांवों को विस्थापित किया जाना था। इस संबंध में मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने सभी जिलाधिकारियों और जंगलात महकमे को पत्र भेजा था।
इससे पहले और बाद में प्रमुख वन संरक्षक डॉ. आरबीएस रावत ने भी संबंधित प्रभागीय वन अधिकारियों और जिलाधिकारियों को दो बार पत्र भेजे थे।
विस्थापन अधर में लटका
लेकिन डीएफओ और संबंधित जिलों के डीएम की लापरवाही की वजह से अभी तक जमीन के चिह्निकरण की प्रक्रिया भी आरंभ नहीं हो पाई है। ऐसे में इन गांवों का विस्थापन अधर में लटक गया है।
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प्रभागीय वन अधिकारियों को प्रमुख वन संरक्षक की ओर से कई बार रिमाइंडर भेजा जा चुका है। डीएम से तालमेल बनाकर जमीन चिह्नित की जानी है, लेकिन अभी तक कोई सूची उपलब्ध नहीं हो पाई है। सूची उपलब्ध होने के बाद भूमि स्थानांतरित करने के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाना है।
- राजेंद्र महाजन, नोडल अधिकारी और अपर प्रमुख वन संरक्षक