उत्तराखंड में आसमान से एक बार फिर आफत की बारिश हुई है। गुरुवार रात से शुरू हुई कहर बरपाती बारिश शुक्रवार रात को थमी।
बारिश, बादल फटने, भूस्खलन और नदी-नालों के उफान से पौड़ी में 15, देहरादून में 7, टिहरी-कुमाऊं में दो-दो और उत्तरकाशी में एक व्यक्ति की मौत हो गई।
हालांकि प्रशासन ने पौड़ी में 14 लोगों के ही मरने की पुष्टि की है। बचाव और राहत कार्य में सेना और एनडीआरएफ की मदद ली जा रही है। कई जगह रास्ते बंद होने से बचाव कार्य में परेशानी आ रही है।
गंगा में उफान से हरिद्वार के कई गांवों में बाढ़ के हालात हैं। मुख्यमंत्री हालात पर नजर रखे हुए हैं।
देहरादून में सात लोग मलबे में दफन
कुल 27 में से 17 मलबे में दफन होने और 10 लोगों की नदी-नालों में बहने से जान गई है। कई लोग नदी-नालों में बह गए हैं। बादल फटने और भूस्खलन से सैकड़ों मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।
देहरादून में तेज बारिश की वजह से शुक्रवार रात काठबंगला क्षेत्र में 3 मकानों पर मलबा आ गया। इसमें एक मकान में पूरा परिवार दब गया। जिससे चार लोगों की मौत हो गई। दून में कुल सात लोग मलबे में दफन हुए हैं।
शुक्रवार रात डीएवी छात्र संघ के पूर्व महासचिव अनिल रावत बरसाती नाले के उफान में बाइक समेत बह गए। उधर, माल देवता इलाके में बांदल नदी के उफान में छह मकान ढह गए। कई किलोमीटर लंबी सड़क और एक पुल बहने से सैकड़ों लोग फंस गए हैं।
नदी में बहे दो श्रमिकों को बचाया
कोटद्वार तहसील क्षेत्र के भाबर में मालन नदी में खनन कर रहे अलीगढ़ के दो श्रमिक यशपाल और मिलेश चौहान उफनाई नदी की चपेट में आकर बह गए।
नदी की धारा में फंसे दो श्रमिकों (लाखन सिंह निवासी हाथरस और रोहिताश निवासी एटा यूपी) को प्रशासन ने कई घंटे की मशक्कत के बाद बचा लिया।
टिहरी जिले के जंगल में 24 घंटे तक फंसे 30 लोगों को रस्सों और पाइपों के सहारे निकाला गया। पिथौरागढ़, चमोली आदि जिलों में भी बारिश ने तबाही मचाई है।
हरिद्वार में टूटा गंगा तटबंध, डूबे गांव
पहाड़ों पर लगातार बारिश से उफनाई गंगा ने एक बार फिर खादर क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। घंटों हुई बारिश के चलते गंगा का जलस्तर खतरे के निशान (294 मीटर) को पार गया।
शनिवार सुबह सात बजे गंगा का जलस्तर 294.80 और शाम को 293.85 पर आ गया लेकिन शनिवार तड़के पांच बजे शेरपुर बेला में गंगा का तटबंध टूट गया। इससे कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। लोगों ने छतों पर शरण ली है।
बरसाती नदियां भी उफान पर आ गई हैं। इससे देहात में करीब 30 गांवों का संपर्क कट गया है। लक्सर के बाढ़ प्रभावित गांवों में एनडीआरएफ की टुकड़ी राहत कार्यों में लगी है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नरेश चौधरी ने बताया कि शनिवार शाम तक रेस्क्यू कर करीब 50 बीमार और बुजुर्ग लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
नदियों में उफान, 10 विद्युत परियोजनाएं ठप
प्रदेश में हो रही भारी बारिश बिजली पर भी आफत बनकर बरसी है। नदियों के उफान से राज्य सरकार की 12 में 10 जल विद्युत परियोजनाओं की टरबाइनें थम गई। जबकि विद्युत लाइनें टूटने से प्रदेश के कई क्षेत्र अंधेरे में डूब गए।
नदियों में बड़े-बड़े बोल्डर और मलबा आने से राज्य जल विद्युत निगम के ढकरानी, ढालीपुर, कुल्हाल, मनेरी भाली-द्वितीय, चीला, पथरी, मोहम्मदपुर, खटीमा जल विद्युत गृहों से शुक्रवार से शनिवार रात तक कोई विद्युत उत्पादन नहीं हो पाया।
10 दिन से बंद कालागढ और मनेरी भाली-प्रथम से भी विद्युत उत्पादन नहीं हुआ। सिर्फ यमुना वैली में छिबरो और खोदरी जल विद्युत गृह से ही उत्पादन मिला।