देवप्रयाग। राजकीय महाविद्यालय देवप्रयाग की पहली पत्रिका ‘नंदा तीरे’ पर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए है। आरोप है कि जहां पत्रिका में तथ्यात्मक त्रुटियां की गई है वहीं महाविद्यालय की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वालों की भी अनदेखी की गई है। पत्रिका के प्रकाश के बाद से अब इसमें सुधार की मांग उठ रही है।
देवप्रयाग महाविद्यालय के 38 वर्षों में पहली बार ‘नंदा तीरे’ पत्रिका का प्रकाशन किया गया है। उक्त पत्रिका का पिछले दिनों श्रीदेव सुमन विवि के कुलसचिव दीपक भट्ट ने विमोचन किया था। महाविद्यालय की स्थापना 4 सितंबर 1979 को तत्कालीन उत्तर प्रदेश के पर्वतीय विकास व उच्च शिक्षा मंत्री डा. शिवानंद नौटियाल के हाथों हुई थी, लेकिन पत्रिका में स्थापना की तिथि वर्ष 1984 लिखी गई है। इसके अलावा पत्रिका में महाविद्यालय की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले स्व. आचार्य चक्रधर जोशी के योगदान को पूरी तरह से अंकित नहीं किया गया है। स्व. जोशी ने 12.5 एकड़ भूमि वन विभाग से हस्तांतरित करवाकर कॉलेज के लिए विशाल भवन निर्माण कराया गया था। पत्रिका में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाने पर देवप्रयाग युवा पुरोहित संगठन के अध्यक्ष प्रवीण ध्यानी, पहाड़ी छात्र सेना के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद जियाल, पूर्व सभासद विद्यार्थी पालीवाल और समाज सेवी सुदर्शन असवाल आदि ने रोष जताया है। उनका कहना है कि पत्रिका में देश-विदेश में प्रसिद्ध देवप्रयाग तीर्थ के इतिहास व महान विभूतियों का कोई उल्लेख नहीं है। इधर, पत्रिका के प्रधान संपादक प्रो. अनिल नैथानी का कहना है कि पहली बार प्रकाशित पत्रिका में रहीं त्रुटियों को अगले वर्ष के अंक में दूर किया जाएगा। साथ ही दिए गए सुझाव शामिल किए जाएंगे।