गोपेश्वर। नारायणबगड़ क्षेत्र के मानूर गांव से डेढ़ सौ मीटर की दूरी पर हो रहे भू-धंसाव से ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है। भू-धंसाव से गांव का पैदल रास्ता और प्राकृतिक पेयजल स्रोत नष्ट हो गए हैं। कई जगहों पर जमीन धंस गई है। ग्रामीणों ने शीघ्र क्षेत्र का भूगर्भीय सर्वे कर गांव के पुनर्वास की मांग उठाई।
नारायणबगड़ से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित मानूर गांव में 30 परिवार रहते हैं। 15 अगस्त की रात को हुई भारी बारिश के दौरान गांव में भू-धंसाव शुरू हो गया था। तब से लगातार यहां भू-धंसाव जारी है। अभी तक करीब सात मीटर भूमि अपनी जगह छोड़ चुकी है। विक्रम सिंह नेगी ने बताया कि भू-धंसाव के कारण पैदल रास्ता क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे ग्रामीण अपने मवेशियों को चरान के लिए जंगल भी नहीं ले जा पा रहे हैं। एडीएम मोहन सिंह बर्निया का कहना है कि मानूर गांव में तहसील से टीम भेजी जाएगी। गांव में भू-धंसाव के निरीक्षण के बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।