श्रीनगर। एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय (केंद्रीय) श्रीनगर और इकोले प्रेतिक डेस होट्स इट्यूड्स (ईपीएचई) फ्रांस संयुक्त रुप से जम्मू-कश्मीर के लेह-लद्दाख में प्राचीन भारतीय संस्कृति के रहस्यों को खोजने का काम करेंगे। इसके लिए दोनों संस्थानों में वैज्ञानिक सहयोग समझौता (एमओयू) हो गया है। गढ़वाल विवि के इतिहास, प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के प्रो. विनोद नौटियाल के निर्देशन में तीन वर्षों तक (2018-20) लेह-लदख में खुदाई कर विशेषज्ञ और रिसर्च स्कॉलर प्राचीन इतिहास को दुनिया के सामने लाएंगे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से उत्खनन के लिए अनुमति भी मिल चुकी है।
गढ़वाल विवि का इतिहास एवं पुरातत्व विभाग इससे पूर्व उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के हिमालयी क्षेत्रों में उत्खनन के जरिए पुरातात्विक सामग्रियों की खोज कर चुका है। अब विभाग ने हिमाचल प्रदेश से आगे बढ़ते हुए कश्मीर का जिम्मा लिया है। इस शोध और खुदाई के कार्य में फ्रांस का संस्थान इकोले प्रेतिक डेस इट्यूड्स पेरिस सहयोग कर रहा है। एमओयू के अनुसार कश्मीर के लेह-लद्दाख में 2018 से 2010 तक उत्खनन कार्य चलेगा। यह कार्य गढ़वाल विवि के पुरातत्व विभाग के प्रो. विनोद नौटियाल के निर्देशन और प्रो. प्रदीप सकलानी के सहनिर्देशन में चलेगा। इसके अलावा टीम में डा. नागेंद्र रावत, अमिता गुप्ता, सुधीर नौटियाल, मोहन नैथानी, एकता सिंह और हृदयेश शामिल हैं, जबकि फ्रांस की ओर से डा. लॉरियन ब्रुनेयू प्रतिनिधित्व करेंगे। प्रो. नौटियाल ने बताया कि वर्ष 2018 से प्रथम चरण में लेह जिले के लेह चोकर क्षेत्र में उत्खनन कार्य शुरू होगा।