चार दशक में मंदाकिनी और केदारघाटी में तेरह बड़ी आपदाएं आ चुकी हैं। इन आपदाओं में सैकड़ों की संख्या में जनहानि हुई और कई-कई गांव व्यापक रूप से तबाह हो गए।
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बावजूद इसके आज तक केदारघाटी मजबूत सुरक्षा तंत्र स्थापित नहीं हो पाया है। आपदा राहत के नाम पर जिले में आपदा प्रबंधन तंत्र गठित तो कर दिया, लेकिन संसाधनों के अभाव में यह खानापूर्ति भर साबित हो रहा है।
रुद्रप्रयाग सहित मंदाकिनी और केदारघाटी समय-समय पर प्रकृति की मार का दंश झेलती रही है। भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं ने यहां के भूगोल के साथ सामाजिक और आर्थिक परिवेश को भी हाशिए पर ला दिया है।
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पिछले चार दशक में कई बार हुए आपदा का शिकार
बारिश का कहर
- फोटो : file photo
बसुकेदार क्षेत्र के भेंटी और पौंडार सहित 34 गांवों में वर्ष 1998 में आपदा से व्यापक तबाही हुई थी। तब 103 लोग काल के मुंह में समा गए थे। राउंलेक और मनसूना गांव भी इस आपदा से प्रभावित हुए थे।
मंदाकिनी नदी के तेज बहाव के कारण निचला क्षेत्र आज भी दरक रहा है। 2001 और 2012 में ऊखीमठ आपदा में 92 लोग मारे गए।
पहाड़ी से आए सैलाब से चुन्नी, मंगोली और ब्राह्मण खोली आदि गांवों को भारी नुकसान हुआ, जिसके निशां आज भी मौजूद हैं। अगस्यमुनि हो, जखोली हो या फिर ऊखीमठ ब्लाक, यहां गिनती के ही गांव हैं, जो सुरक्षित हैं। अधिकांश गांव पिछले चार दशक में कभी न कभी किसी कारण आपदा का शिकार हुए हैं।
वर्ष 1997 में अस्तित्व में आए रुद्रप्रयाग जनपद में आपदा प्रबंधन तंत्र स्थापित तो किया गया, लेकिन इन 18 वर्षों में यह खानापूर्ति भर ही रहा। हालात इस कदर हैं कि आपदा राहत के यंत्र व उपकरणों को चलाने के लिए विभाग के पास विशेषज्ञ नहीं है। संविदा और उपनल पर तैनात कर्मचारियों के भरोसे राहत व बचाव कार्य हो रहे हैं।
बड़ी प्राकृतिक आपदाएं
वर्ष --- आपदा
1979 - क्यूंजा गाड़ में बाढ़ से कोंथा, चंद्रनगर और अजयपुर क्षेत्र में तबाही, 29 लोग मरे।
1986 - जखोली तहसील के सिरवाड़ी में भूस्खलन, 32 मरे।
1998 - भूस्खलन से भेंटी और पौंडार गांव ध्वस्त। साथ ही 34 गांवों में जनधन की हानि। 103 लोगों की मौत।
2001 - ऊखीमठ के फाटा में बादल फटा, 28 मरे।
2005 - बादल फटने से विजयनगर में तबाही, चार की मौत।
2008 - चौमासी-चिलौंड गांव में भूस्खलन। एक युवक मरा और कई मवेशी मलबे में दबे।
2009 - गौरीकुंड घोड़ा पड़ाव में भूस्खलन, दो श्रमिक मरे।
2010 - कई स्थानों पर बादल फटे, एक युवक बहा।
2012 - ऊखीमठ के गांवों में बादल फटा, 64 लोगों की मौत।
2013 - केदारनाथ आपदा में हजारों लोगों की मौत, पूरी केदारघाटी प्रभावित।
आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत और संसाधनयुक्त बनाने के लिए हरसंभव प्रयास हो रहे हैं। जिले में राहत एवं बचाव कार्य से जुड़े कुशल कर्मियों की तैनाती के लिए भी शासन स्तर पर पत्राचार किया जा रहा है। डेस्क के माध्यम से भी नजर रखी जा रही है।
- डॉ. राघव लंगर, डीएम रुद्रप्रयाग