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राज्यगीत चुना, बजा और फिर ‘गुम’ हो गया

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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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पूर्व सरकार के कार्यकाल में उत्तराखंड राज्य के लिए घोषित किए गए राज्यगीत एक बार स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर बजने के बाद ‘गुम’ हो गया है। इस मामले में संस्कृति विभाग और राज्यगीत चयन कमेटी नई सरकार का पक्ष न आने का हवाला दे रहे हैं। वहीं राज्यगीत के रचयिता हेमंत बिष्ट भी चयन के बाद गीत के ‘गुम’ होने पर हतप्रभ हैं।
उत्तराखंड राज्य के अपने गीत के लिए तत्कालीन हरीश रावत की सरकार ने फरवरी 2016 के प्रथम सप्ताह में एक सार्वजनिक सभा में राज्यगीत की घोषणा की थी। इसके बाद 4 मार्च को राज्यपाल की ओर से भी सहमति मिल गई। पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान 15 अगस्त के मौके पर गीत बजाया भी गया, लेकिन नई सरकार के आने के बाद से राज्य गीत नहीं बजा।
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बता दें तत्कालीन हरीश रावत की सरकार ने राज्य गीत को लेकर बेहद जोर दिया था। सरकार ने संस्कृति विभाग को राज्यगीत चयन का काम सौंपा था। इसके बाद संस्कृति विभाग ने गीत के चयन के लिए कमेटी बनाई और विज्ञापन के माध्यम से देशभर से प्रविष्टियां मांगीं। करीब 13 लोगों की कमेटी के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह बटरोही और उपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह नेगी थे। कमेटी को 203 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं। इनमें से कुमाऊं के हेमंत बिष्ट का गीत चुना गया। इस दौरान बिष्ट से गीत में कुछ संशोधन कराए गए। इसके बाद कमेटी ने गीत की धुन तैयार करने की जिम्मेदारी लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी को दी। नेगी ने दिल्ली के एक स्टूडियो में गीत कंपोज कर तैयार किया। इसके बाद गीत सरकार को सौंप दिया गया। कैबिनेट की सहमति के बाद हेमंत बिष्ट के गीत को राज्यगीत का दर्जा मिला, लेकिन 15 अगस्त के मौके पर गीत बजने के बाद ‘गुम’ है।
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हमारी कमेटी ने राज्यगीत चुन लिया था। इसे बेहद कवायद के बाद पूरी तरह से तैयार भी कर लिया गया था। इसके बावजूद गीत किसी अवसर पर सुनाई नहीं दे रहा है। गीत किस लाइब्रेरी में है, नहीं पता। इस बारे में नई सरकार की क्या मंशा है, हम कुछ नहीं कह सकते हैं।
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-नरेंद्र सिंह नेगी, उपाध्यक्ष, चयन कमेटी राज्यगीत
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संस्कृति विभाग की ओर से कमेटी गठित कर गीत का चयन करा लिया गया था। गीत को कैबिनेट में भी रखा गया था। इस संबंध में नई सरकार से नए सिरे से कोई बातचीत नहीं हुई है। इसलिए कुछ नहीं कहा जा सकता है।
-बीना भट्ट, निदेशक, संस्कृति विभाग

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राज्यगीत की कुछ पंक्तियां
उत्तराखंड देवभूमि मातृ भूमि, शत-शत वंदन अभिनंदन
दर्शन संस्कृति धर्म साधना क्षम रंजित तेरा कण-कण, अभिनंदन-अभिनंदन
गंगा यमुना तेरा आंचल, दिव्य हिमालय तेरा शीष
सब धर्मों की छाया तुझ पर, चारधाम देते आशीष
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