उत्तराखंड और यूपी की सीमा पर दो और बाघों की हत्या हो गई। अमानगढ़ टाइगर रिजर्व के जंगल में बाघ की दो खाल, हड्डी और मांस के साथ 12 शिकारियों को गिरफ्तार किया गया है।
खाल और हड्डियां लेकर फरार होने की फिराक में
अमानगढ़ (बिजनौर) टाइगर रिजर्व उत्तराखंड के कार्बेट टाइगर रिजर्व से लगता क्षेत्र है। सूत्रों के मुताबिक शिकारियों ने चार दिन पहले ही इन दोनों बाघों को मारा। लेकिन इससे पहले कि खाल और हड्डियां लेकर फरार हो पाते, 15 दिसंबर की रात को उन्हें दबोच लिया गया।
पढ़ें, मोदी की गर्जना से परेशान कांग्रेस ने दिए जवाब
यह ऑपरेशन यूपी एसटीएफ और वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो ने संयुक्त रूप से चलाया था। अमानगढ़ वन रेंज में रविवार रात ये शिकारी वादीगढ़ चौराहे के पास पकड़े गए। ये लोग कार से हरियाणा की तरफ भागने की फिराक में थे।
पुलिस ने जिन्हें गिरफ्तार किया है, उनमें चर्चित शिकारी धर्मवीर, मोहम्मद उमर और कार्बेट के झिरना रेंज से निकाला गया वाचर करतार सिंह भी है। इनके अलावा मेंहदी, कालिया नाथ, भोलूनाथ, अजूबा (ऋषिकेश निवासी), प्रवीण, अतीशनाथ, अजेय नाथ, अरुणनाथ और ड्राइवर इमरान खान की गिरफ्तारी हुई है।
पूछताछ जारी है
सभी से गुप्त स्थान पर पूछताछ की जा रही है। उमर, धर्मवीर व एक भोलू नजीबाबाद से एक साल पहले भी बाघ की खाल के साथ पकड़े गए थे। दो माह पहले ही यह तीनों जेल से बाहर आए और फिर इस काम में जुट गए।
उमर का नाम पीलीभीत में 30 अक्तूबर को बाघिन के शिकार और तस्करी में सामने आया था। तभी से उत्तराखंड, यूपी पुलिस, जंगलात महकमे की टीम उसके पीछे लगी थी।
पढ़ें, आपदाः 6 माह बाद अपनी जमीन पर 'रिफ्यूजी' हैं लोग
कार्बेट के वार्डन सतीश चंद्र उपाध्याय ने बताया कि जंगल (जसपुर कक्ष संख्या 50) में बाघ का शिकार करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले आठ कड़के (फंदे) भी बरामद हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े लोगों के मुताबिक इन्हीं फंदों में दोनों बाघ फंस गए, जिन्हें मार गिराया गया।
शिकारी पूरी तैयारी के साथ आए थे। उन्हें बाघ के मूवमेंट, संख्या आदि के बारे में सटीक खबर थी। सेंट्रल वाइल्ड लाइफ कंट्रोल ब्यूरो नार्थ के डिप्टी डायरेक्टर निशांत वर्मा ने बताया कि खाल महज तीन-चार दिन पुरानी है।
पढ़ें, शादी में गई किशोरी के साथ दुष्कर्म
बताया जा रहा है कि ये शिकारी छजमलवाला में रुके थे। सुरक्षा एजेंसियों को सर्विलांस के जरिये इनकी भनक मिली। इनकी गिरफ्तारी के बाद वन्य क्षेत्र में गश्त तेज कर दी गई है।