ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
दो सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज उपनल कर्मचारी अब सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। कर्मचारियों ने सरकार पर कोरे आश्वासन देकर उन्हें बरगलाने का आरोप लगाया है। इसके विरोध में प्रदेशभर के करीब 20 हजार उपनल कर्मचारी 16 अप्रैल से आंदोलन करेंगे।
रविवार को उपनल कर्मचारी महासंघ की जिला कार्यकारिणी की बैठक कालूमल धर्मशाला में हुई। महासंघ के संरक्षक भावेश जगूड़ी ने कहा कि कर्मियों की तनख्वाह बढ़ाते वक्त प्रदेश सरकार हमेशा वित्तीय बोझ बढ़ने का रोना रोती है। वहीं, मंत्रियों और विधायकों के वेतन में कई गुना बढ़ोतरी कर दी जाती है। इससे पता चलता है कि सरकार का हजारों युवाओं से कोई सरोकार नहीं है। जबकि उपनल कर्मचारी प्रत्येक विभाग में ईमानदारी से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
जिलाध्यक्ष अभिनव जोशी ने समान कार्य के लिए समान वेतन या 21 हजार रुपये न्यूनतम वेतन प्रतिमाह देने की मांग की। साथ ही प्रदेश में कार्यरत सभी उपनल कर्मियों के सुरक्षित भविष्य के लिए नियमावली बनाने और किसी भी कर्मी को विभाग से न हटाने का शासनादेश जारी करने की मांग की। मीडिया प्रभारी हेमंत रावत ने कहा कि10 से 12 साल की नियमित सेवा के बावजूद कर्मियों के नियमितीकरण का स्पष्ट नियम नहीं बना, जिसके चलते कर्मचारी आंदोलन को मजबूर हैं। विद्यासागर धस्माना, दीपक चौहान, विनोद गोदियाल, हरीश कोठारी, रोहित वर्मा, नरेश शाह, महेश भट्ट, दिनेश रावत आदि मौजूद रहे।