परिवहन प्राधिकरण की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगती है तो न सिर्फ लाखों कमर्शियल वाहनों का संचालन ठप हो जाएगा बल्कि इससे जुड़े लाखों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा हो जाएगा। एक अनुमान के मुताबिक प्रदेश भर में ढाई लाख से अधिक कमर्शियल वाहन संचालित हैं। इनमें अधिकतर वाहन 10 साल से अधिक पुराने हैं।
परिवहन महासंघ विरोध में उतरा, बुलाई आपात बैठक
परिवहन विभाग के इस प्रस्ताव का परिवहन महासंघ ने विरोध शुरू कर दिया है। चारधाम यात्रा संचालित करने वाली 13 कंपनियों ने इस फैसले के खिलाफ आंदोलन का मन बना लिया है। महानगर सिटी बस सेवा महासंघ के अध्यक्ष विजयवर्धन डंडरियाल का कहना है कि इस फैसले का पुरजोर विरोध किया जाएगा। यदि सरकार को इसे लागू ही करना है तो पहले राज्य में सीएनजी, इलेक्ट्रिक बसों की व्यवस्था करनी होगी।
यदि एक तरफा फैसला लेकर इसे लागू किया जाता है तो इससे अराजकता का माहौल बन जाएगा। दूसरी ओर इस फैसले का लाखों लोगों की जिंदगी पर सीधा असर पड़ेगा। इस बाबत शुक्रवार को परिवहन महासंघ की बैठक बुलाई गई है। इसमें तमाम पहलुओं पर चर्चा करने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।