उत्तराखंड सरकार ने अफसरों के विदेश जाकर स्टडी लीव पर रोक तो लगा दी है लेकिन पूर्व में कई अफसरों ने विदेश जाकर अच्छी रिपोर्ट तैयार कीं।
सरकारी खजाने से लाखों खर्च
इनमें शासन-प्रशासन में सुधार और आईटी सेक्टर के लिए उपयोगी जानकारी वाली रिपोर्टें भी शामिल हैं। सरकारी खजाने से लाखों खर्च कर तैयार की गई रिपोर्टों से राज्य सरकार न तो लाभ उठा पाई है, न ही इस बाबत कोई कार्ययोजना बनी है।
आधा दर्जन से ज्यादा अफसरों की उपयोगी और अहम रिपोर्ट सालों से धूल फांक रही हैं। यह भी संयोग ही है कि जिस स्टडी लीव को केंद्र सरकार प्रमोट करती है वही राज्य सरकार की नजर में सैर-सपाटे से ज्यादा नहीं है।
1985 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री पी.चिदंबरम ने आईएएस अफसरों के स्टडी लीव टूर को प्रमोट करने के साथ ही रेग्युलर भी कर दिया था। इसके पीछे मंशा यही थी कि देश-दुनिया में क्या हो रहा है उसे समझा जाए।
अगर कोई उपयोगी व्यवस्था दिखती है तो उसे अपने राज्यों में यथासंभव लागू किया जाए। लेकिन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने विगत दिवस कहा कि ऐसी स्टडी लीव पर ही अफसरों को भेजा जाएगा जो कि राज्य के लिए काम आ सके।
बेहद उपयोगी हैं कई रिपोर्टें
कई अफसरों ने राज्य के काम आने वाली रिपोर्टें तैयार की हैं। मसलन, आईएएस दंपति उमाकांत व मनीषा पंवार 2005 में अमेरिका के बोस्टन यूनिवर्सिटी गए थे।
उमाकांत ने चार साल तक पब्लिक हेल्थ में पीएचडी की और मनीषा ने पब्लिक हेल्थ में ही मास्टर डिग्री ली। दोनों की रिपोर्ट का लाभ राज्य की बिगड़ी सेहत व्यवस्था सुधारने में नहीं किया गया।
आईएएस आरके सुधांशु पिछले महीने ही अमेरिका की ड्यूक यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ इंटरनेशनल प्रोग्राम की डिग्री लेकर लौटे हैं।
एक साल तक नीति निर्धारण, क्रियान्वनय, वित्तीय विकेंद्रीकरण, वित्त प्रशासन, पब्लिक सर्विस डिलीवरी, लैंड रिकॉर्ड डिजिटलाइजेशन में आईटी के प्रयोग का अध्ययन किया।
उनकी रिपोर्ट राज्य के लिए बेहद अहम हो सकती थी, लेकिन उपयोग नहीं हो पा रहा है। 2010 में आईएएस अमित नेगी ने इंग्लैंड के इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडी में एक वर्ष तक सामान्य व लोक प्रशासन में सुधार और सरकारी सिस्टम में क्वालिटी बढ़ाने व तेजी लाने का अध्ययन किया।
यही नहीं, 1994 में उत्पल कुमार सिंह ने भी विदेश जाकर अध्ययन किया। इसके अलावा आनंद बर्धन, भूपिंदर कौर औलख समेत दर्जन भर आईएएस अफसरों ने स्टडी लीव लेकर रिसर्च की लेकिन उनकी यह पढ़ाई अब किसी काम की नहीं रही।
जिन अफसरों ने विदेश में स्टडी की है, उनकी रिपोर्ट का समय-समय पर सदुपयोग संबंधित सेक्टर के लिए किया जाता है। अधिकारियों को स्टडी लीव पर इसीलिए भेजा जाता है ताकि राज्य को उसका फायदा मिल सके।
- सुभाष कुमार, मुख्य सचिव