देहरादून की दो बेटियों का नाम रविवार की सुबह इतिहास के पन्नों पर स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गया।
जुड़वा बहनें ताशी मलिक (21) और नुंग्शी मलिक (21) ने एवरेस्ट पर झंडा फहराकर उत्तराखंड का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।
इससे पहले भी कई पर्वतारोहण अभियान में कामयाबी दर्ज कर चुकी ताशी और नुंग्शी के लिए एवरेस्ट फतह करना एक सपना था।
रविवार की सुबह 7:40 बजे अचानक सेटेलाइट फोन की धीमी आवाज में बेटियों की गौरवान्वित करने वाली आवाज पिता कर्नल (रि) विरेंद्र सिंह मलिक के मोबाइल पर आई,’ पापा हमने कर दिखाया’।
रातभर इस आवाज को सुनने को बेताब पिता की आंखों में एक नई चमक तैर गई।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 8 मार्च को दून से मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने इस दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
19 मई को सुबह चार सदस्यीय दल 8850 मीटर ऊंचाई पर तिरंगा फहराने में कामयाब रहा। दल में दो पाकिस्तानी भाई बहन मिर्जा अली (29वर्ष) व समीना बेग (22वर्ष) भी शामिल हैं।
ऐसे हुई एवरेस्ट फतह
रवाना होने के बाद पर्वतारोही दल ने नेपाल के पोखरा में दो सप्ताह तक प्रशिक्षण लिया। दस दिन काठमांडू रुके। 4 अप्रैल को फ्लाइट से लुकला पहुंचे। लुकला से नामचे बाजार पैदल गए। वहीं से ट्रैकिंग की शुरुआत होती है।
बेटियों को लेकर डर रहता था
ताशी और नुंग्शी के पिता कर्नल विरेंद्र सिंह मलिक ने 2008 में 2/8 गोर्खा राइफल से स्वैच्छिक अवकाश ग्रहण कर लिया था।
उन्होंने कुपवाड़ा में दुश्मनों से डटकर लोहा लिया था लेकिन कभी दहशत नहीं हुई थी लेकिन जब से बेटियां पर्वतारोहण अभियान पर गई थी, तब से उन्हें हर समय चिंता लगी रहती थी।
उनकी मां अंजू थापा मलिक को जब से यह खबर मिली है, मानों पूरी दुनिया की खुशी उनके दामन में समां गई है।