उत्तराखंड में आपदा भले ही थम गई हो, लेकिन अभी भी इसका कहर जारी है। अभी भी हजारों लोग लापता हैं। 16 जून को आपदा आई और 14 जून को करीब 13 हजार तीर्थयात्रियों ने केदारनाथ में दर्शन किए थे। अभी तक लगभग 1000 हजार से ज्यादा लोगों के सेना ने रेस्क्यू कर बचाया है। बाकी बचे 12 हजार लोग अभी भी लापता हैं।
जोशीमठ से केदारनाथ धाम जाने के लिए 14 किमी. की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। यहां बुजुर्ग, बीमार और बच्चों को केदारनाथ पहुंचाने के लिए डोलियों की व्यवस्था है। इसके साथ ही दूरी को तय करने के लिए जोशीमठ से 5500 खच्चर भी रजिस्टर हैं।
आपदा के बाद अभी यह नहीं पता लग पाया है कि आखिर ये 5500 खच्चर, इनके मालिक और इनमें सवार यात्री कहां हैं? इससे अंदाजा लगा जा सकता है कि साढ़े पांच हजार खच्चरों सहित लगभग 11 हजार लापता हैं।
इसके साथ ही केदारनाथ में डंडी से जाने वाले 2800, कंडी से जाने वाले 500, 1000 होटल कर्मचारी, 500 व्यापारी, 700 सरकारी कर्मचारी, 100 पुरोहित और 120 सुलभ इंटरनेनल के कर्मचारी सहित करीब पांच हजार सात सौ बीस लोग भी लापता हैं।