मंगलवार को एक बार फिर बारिश लोगों के लिए मुसीबतें लेकर आई। शहर में सुबह सवेरे कहीं जल भराव हुआ तो हीं नदियों और नाले के किनारे पानी के बहाव के साथ मकान और पुश्तें बह गए।
उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
कुछ दिन पहले ही बारिश से शहर में भारी नुकसान हुआ था, लेकिन प्रशासन ने इससे कोई सबक नहीं लिया। न तो नदी-नलों के आसपास से अतिक्रमण हटाए गए हैं और न ही सड़कों पर जलभराव रोकने के लिए कोई व्यवस्था हो पाई है।
यहां हुई परेशानी
-बारिश से मोहिनी रोड पुल के पास पुश्ता और सड़क टूट गई। रिस्पना नदी का पानी पास कई घरों में घुस गया।
-घंघोड़ा स्थित संतला देवी मार्ग पर लून नदी पर बना पुल पानी के बहाव में टूट गया। इससे कई गांवों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है।
-नालापानी मंदिर के पास पुल का पुश्ता टूट गया है। इससे कई घरों में बारिश का पानी भर गया।
-बिंदाल नदी किनारे रामपुरम में अशोक आटो रिपयेरिंग सेंटर पुश्ता टूटने से बह गया।
-ब्रह्मपुरी नाले के पास पुश्ता टूटने से दो मकान ढह गए।
-सुद्धोवाला घाटी के पास पुश्तें बहने से दस मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।
-नेहरू ग्राम में कई घरों में पानी भरा। पुल टूटने का खतरा बना हुआ है।
-झाड़ीवाला में संतला देवी के पास नाले का बहाव कई पुश्तें बहा ले गया।
-सहस्रधारा रोड स्थिति शालिनी स्कूल के पास पुश्ता टूटने से कई घरों में पानी भर गया। भगत सिंह कालोनी में जल भरवा हुआ। यहां एसओ रायपुर शंकर सिंह बिष्ट रातभर मशक्कत करते रहे।
-कैनाल रोड गैस गोदाम के पास कई पुश्तें और सड़कें बह गई हैं।
-अधोईवाला में मंदिर का पुश्ता भी बह गया है।
टपकेश्वर मंदिर में भरा मलबा
सोमवार रात हुई बारिश एक बार फिर टपकेश्वर मंदिर के लिए भारी साबित हुई। मंदिर में हनुमान जी मूर्ति के पास का शेड टूटा गया और गुफा में पांच फीट मलबा जाम हो गया है। मंदिर के आचार्य विपिन जोशी ने बताया कि केवि बीरपुर की तरफ से पानी के साथ आए मलबे ने पहले तो विद्यालय की बाउंड्री वॉल तोड़ी और इसके बाद मंदिर परिसर के अंदर तक पहुंच गया।
उन्होंने बताया कि मंगलवार को हनुमान जी की आरती भी बाहर से ही करनी पड़ी। गुफा से मलबा हटाने में पांच-सात दिन लगेंगे।