सरिता दीवान की अपनी बेटी अब 24 साल की है। करियर की राह पर अग्रसर। बात आठ साल पहले की है। एक रिश्तेदार की पत्नी गर्भवती थी। उनकी तीन बेटियां पहले से थीं। वह बेटे की चाह कर रहे थे। लेकिन ईश्वर को इस बार भी बेटी ही मंजूर थी।
चौथी बेटी की आमद से जहां मां को खुशी से भर दिया, वहीं पिता को यह नहीं भाया। आखिर मां ने सरिता से इसरार किया कि वह कोप का भाजन बनती बेटी को अपने साथ ले जाएं। सरिता ने पति से मशविरा किया और उनकी सहमति से उस बेटी को लेने पहुंच गई। घर लाकर उसका नामकरण किया।
पछतावा हुआ
यह बच्ची कुछ माह उनके घर रही। आखिर बाद में बच्ची के पिता को अपने किए पर पछतावा हुआ। वह अपनी बच्ची को लेने सरिता के धर्मपुर स्थित घर आ पहुंचे। उनका पछतावा देख सरिता ने उन्हें बच्ची को सौंप दिया। उस रिश्तेदार की इसके बाद एक और बेटी हुई, लेकिन फिर कभी उन्होंने बेटी के नाम पर नाक-भौं नहीं सिकोड़ी। आज वह अपनी बेटियों को बेहद प्यार से रख रहे हैं।
बेटियां बचाओ अभियान के तहत फोन करने वालों का सिलसिला कायम है। शुक्रवार को भी कई फोन अभियान से जुड़ने की इच्छा रखने वालों के घनघनाए।
इन्होंने रखी फोन पर अपनी बात-
मुश्ताक खान, ब्रह्मपुरी
राजीव तनेजा
मनीषा गुप्ता, चुक्खूवाला
नीमा अरोड़ा, पूर्वी पटेलनगर
राजेश मलिक, करनपुर चौक
लक्ष्मी क्षेत्री, गढ़ी कैंट
राहुल नेगी, राजपुर रोड
अशोक बिष्ट, डीएवी कालेज रोड
रीता गैरोला, एमकेपी कालेज रोड
कुंदन कैंतुरा, निरंजनपुर