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जंगल की जमीन भी निगल रहे हैं भूमाफिया

Sat, 16 Feb 2013 02:19 PM IST
देहरादून/ब्यूरो
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राजधानी में जंगल की जमीनों पर धड़ल्ले से कब्जा किया जा रहा है। भारतीय वन अधिनियम 1980 और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ताक पर रखकर भूमाफिया यह खेल कर रहे हैं।
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इसमें जिला प्रशासन और जंगलात महकमे के अधिकारियों की भी मिलीभगत सामने आ रही है। मामलों के खुलासे के बावजूद किसी स्तर पर कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। नतीजतन जंगल की जमीनों पर कंक्रीट के जंगल खड़े हो रहे हैं।

केस -1
ईस्ट होपटाउन के रिजर्व फॉरेस्ट की लगभग 254 एकड़ भूमि राजस्व अभिलेखों में ग्राम समाज के नाम दर्ज करके पट्टे जारी कर दिए गए हैं। साल के जंगल का सफाया करके ताबड़ तोड़ निर्माण किया जा रहा है। जमीन को बचाने के लिए जंगलात महकमे के कुछ अधिकारियों की ओर से प्रशासन के अधिकारियों से लिखा पढ़ी भी की गई, लेकिन राजस्व अभिलेखों में हुई गलती को सुधारने के लिए प्रशासन के अधिकारी तैयार नहीं है। दो साल पहले इस पूरे खेल का खुलासा हुआ था, लेकिन तब से लेकर आज तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। वर्तमान में इस जमीन की कीमत अरबों रुपये आंकी जा रही है।
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केस - 2
चंद्रबनी में लगभग 500 बीघा जमीन पर दिन रात निर्माण कार्य चल रहे हैं। जंगलात महकमे के अधिकारियों और कर्मचारियों की नाक के नीचे यह खेल चल रहा है। एक साल पहले तत्कालीन प्रभागीय वन अधिकारी मीनाक्षी जोशी ने इसे बचाने के लिए प्रयास किए थे, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने इसमें सहयोग नहीं किया। यह कब्जा वन चौकी से चंद मीटर की दूरी पर चल रहा है। फॉरेस्ट गार्ड की आंख के सामने कब्जे होते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं की जा रही। इससे साफ है कि नीचे से लेकर ऊपर तक के अधिकारी इस खेल से जुड़े हैं।

राजधानी में जंगलात की जमीन पर कब्जे
वन प्रभाग देहरादून 597.8025 हेक्टेयर
वन प्रभाग मसूरी 111.0518 हेक्टेयर
कुल 708.8563 हेक्टेयर

जंगलात की जमीन पर जहां भी कब्जे हुए हैं। उसे हटाने के लिए प्रयास किया जाएगा। चंद्रबनी और ईस्टहोप टाउन के मामलों को भी टेकअप किया जाएगा। इस सिलसिले में प्रशासन और पुलिस की भी मदद ली जाएगी।
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- सुशांत पटनायक, प्रभागीय वन अधिकारी देहरादून

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