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'उत्तराखंड सरकार की ओर से कोई मुआवजा राशि नहीं मिलेगी'

Sat, 13 Jul 2013 08:40 AM IST
देहरादून/ब्यूरो
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केदारघाटी के जल प्रलय में दूसरे राज्यों के मृत और लापता लोगों यात्रियों के परिजनों को अब उत्तराखंड सरकार की ओर से कोई मुआवजा राशि नहीं मिलेगी। कैबिनेट ने तय किया है कि अन्य राज्यों के मृतकों को प्रधानमंत्री और संबंधित राज्यों की सरकारों की ओर से ही मुआवजा दिया जाएगा।
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नुकसान और जनहानि पर चर्चा
मंत्रिमंडल की शुक्रवार शाम हुई बैठक में 15 जून को केदारघाटी में आई आपदा से नुकसान और जनहानि पर चर्चा हुई। इसमें उत्तराखंड निवासी मृतकों और लापता लोगों के परिजनों को मुआवजा राशि देने की व्यवस्था भी बनाई गई। कैबिनेट की ब्रीफिंग में सीएम विजय बहुगुणा ने कहा कि 15 जून से लापता व्यक्ति के 15 जुलाई तक नहीं मिलने पर सरकार उसे मृत मानेगी और निर्धारित मानक के अनुसार पांच लाख रुपये मुआवजा देगी।

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मृत घोषित करने केसवाल पर सीएम ने कहा कि कानूनी बाध्यता से ऐसा करना संभव नहीं है। लेकिन मुआवजा देने को 30 दिन की मिसिंग को मानक माना जा रहा है। लापता लोगों के परिजनों से एक शपथ पत्र लेकर मुआवजा राशि देने की प्रक्रिया 15 जुलाई के बाद शुरू कर दी जाएगी। शपथ पत्र का प्रारूप सरकार खुद बनाएगी। साथ ही लापता लोगों की तलाश का कार्य भी जारी रहेगा।
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प्रधानमंत्री देंगे मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख
दूसरे राज्यों के लापता व्यक्तियों के परिजनों को मुआवजा देने की व्यवस्था के सवाल पर सीएम बहुगुणा ने कहा कि केंद्र और संबंधित राज्य की सरकारें लापता व्यक्तियों के परिजनों को निर्धारित मुआवजा राशि मुहैया कराएंगी। सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मुख्य सचिवों से इस बारे में बातचीत की जा रही है। यहां बता दें कि प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख और उत्तराखंड सरकार ने तीन-तीन लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है।

इसी तरह अन्य राज्यों की सरकारों ने भी अपने राज्यों के मृतकों के लिए अलग-अलग मुआवजा राशि की घोषणा की है। इधर, जनहानि की वास्तविक संख्या पर सरकार कुछ साफ नहीं कह सकी। बैठक में उत्तराखंड के 924 लोग लापता बताए गए तो वहीं दूसरे राज्यों के लापता यात्रियों का आंकड़ा 4847 तक पहुंच गया है।

सूचना देने का दबाव बढ़ा
इस तरह सूची में यह संख्या 5771 तक पहुंच गई है। कुछ राज्यों से अभी भीआंकड़े अपडेट किए जा रहे हैं। राज्य सरकार का हाईटेक मिसिंग सेल भी इस काम को पूरा करने में अक्षम साबित हो रहा है। वहीं दूसरे राज्यों की सरकारों का अपने यहां के लापता, मृत और घायल लोगों की सूचना देने का दबाव उत्तराखंड सरकार पर बढ़ता जा रहा है।
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