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बिना खेले बना विजेता

Mon, 19 Aug 2013 05:36 AM IST
Dehradun
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देहरादून। प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता और टीमें सिर्फ तीन...। आपको शायद यकीन नहीं आएगा लेकिन यही सच है। विद्यालयी शिक्षा विभाग के तत्वावधान में रविवार को हुए नेहरू हाकी टूर्नामेंट में सिर्फ देहरादून जिले से टीमें शामिल हुईं। अंडर-17 वर्ग में तो एक मैच खेला भी गया, लेकिन अंडर-15 वर्ग में पहुंची एकमात्र सेंट एग्नेस की टीम को बिना खेले ही विजेता घोषित कर दिया गया। टीमों के नहीं पहुुंचने के कारण यह प्रतियोगिता एक दिन में निपट गई।
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विद्यालयी शिक्षा विभाग की खेल प्रतियोगिताएं सिर्फ खानापूर्ति तक सीमित रह गई हैं। सुब्रतो कप फुटबाल टूर्नामेंट के बाद रविवार को नेहरू हाकी टूर्नामेंट भी मजाक बन गया। महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज में बालक वर्ग की राज्यस्तरीय नेहरू हाकी टूर्नामेंट की शुरुआत होनी थी। लेकिन अंडर-15 वर्ग में सेंट एग्नेस और अंडर-17 वर्ग में सेंट एग्नेस और स्पोर्ट्स कालेज की ही टीम पहुंची। आयोजकों का कहना है कि उन्होंने सभी जिलों को पत्र भेजा था, लेकिन जिलों ने टीम भेजी ही नहीं। टूर्नामेंट में आने वाले खिलाड़ियों का खर्च जिला स्तर पर ही उठाना पड़ता है, शायद इसी कारण यह स्थिति बनी।

इनकी सुनिये
मुझे अभी रिपोर्ट नहीं मिली है, मगर ऐसा क्यों हो रहा है इसकी जांच कराई जाएगी। सभी जिलों को टीमें भेजने के निर्देश हैं। आपदा के कारण तीन जिलों से टीमें नहीं आना तो समझा जा सकता है, लेकिन अन्य जिलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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-सीएस ग्वाल, शिक्षा निदेशक

प्रदेश में कुल जिले हैं। - 13
टीमें बनती हैं । - 26 (अंडर-15, 17)
प्रतियोगिता में शामिल हुई केवल 03 टीमें

एक मैच जीतकर स्पोर्ट्स कालेज चैंपियन
देहरादून। राज्यस्तरीय नेहरू कप हाकी प्रतियोगिता में स्पोर्ट्स कालेज और सेंट एग्नेस की टीमें खिताब जीतने में सफल रही। महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज ने अंडर-17 का खिताब जीता। जबकि अंडर-15 में किसी और टीम के नहीं पहुंचने पर सेंट एग्नेस की टीम को विजेता घोषित किया गया।
महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज में हुई प्रतियोगिता के अंडर-17 वर्ग के फाइनल में स्पोर्ट्स कालेज का सामना सेंट एग्नेस से हुआ। मुकाबला स्पोर्ट्स कालेज ने 10-0 के अंतर से जीता। स्पोर्ट्स कालेज के सारिक ने 4, प्रवीण और मनोज ने 2-2, लोकेश एवं सिद्धार्थ ने एक-एक गोल दागा। दोनों वर्गों की विजेता टीम अब राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेंगी।

ऐसे कैसे पैदा होंगे खिलाड़ी
प्रदेश में खेल और खिलाड़ी का बुरा हाल है। शायद यही वजह है कि अब अपने बच्चों को कोई खिलाड़ी नहीं बनाना चाहता। स्कूली खेलों का हाल यह है कि प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं में जहां 26 टीमों को शामिल होना चाहिए था वहां केवल तीन टीमें पहुंची। अंडर-15 वर्ग में तो एक ही टीम शामिल हुई। ऐसी स्थिति में प्रदेश में खिलाड़ी कैसे उभरेंगे यह बहुत बड़ा सवाल है। खेलों की इस बदहाली पर संबंधित महकमा बिल्कुल भी चिंतित नजर नहीं आता। यदि होता तो एक के बाद एक प्रतियोगिताओं में टीमें शामिल नहीं हो रही है और वह कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
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