ऋषिकेश। तीर्थनगरी में गंगा तटों के सौंदर्यीकरण और बाढ़ सुरक्षा के लिहाज से बना आस्थापथ बरसात से कई स्थानों पर दरक चुका है। करोड़ों की लागत से बनी इस योजना को हुए नुकसान से आसपास के तटीय इलाकों के लिए खतरा पैदा हो गया है।
बैराज से मुनिकीरेती तक करोड़ों की लागत से बना आस्थापथ और गंगाघाट बारिश के कारण कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। 2009-10 में बना मुनिकीरेती आस्थापथ का एक हिस्सा और लगभग सौ मीटर गंगाघाट 2010 की बाढ़ में ही बह गया था, जबकि इस साल जून में आई बाढ़ में मुनिकीरेती में जीएमवीएन के गंगा रिजार्ट गेस्ट हाउस के समीप आस्थापथ का करीब ढाई सौ मीटर हिस्सा ढह गया। वर्तमान में सिंचाई विभाग नरेंद्रनगर खंड बाढ़ सुरक्षा के नाम पर लाखों की लागत से अस्थायी कार्य करा रहा है। दूसरी ओर इस साल की बाढ़ के कारण ऋषिकेश में त्रिवेणीघाट से मायाकुंड तक गंगाघाट का एक हिस्सा और हरिद्वार मार्ग साईं मंदिर घाट के पास करीब ढाई सौ मीटर आस्थापथ बह गया। स्थानीय लोग इसका कारण आस्थापथ योजना के क्रियान्वयन में निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी खामियों को मानते हैं। उनका कहना है कि सिंचाई विभाग द्वारा आस्थापथ के निर्माण के समय नदी तटों पर किए गए अतिक्रमण को नहीं हटाना भी इसकी एक वजह है। साई मंदिर घाट के पास आस्थापथ के ऊपर किए गए निर्माण के धंसने से हुई क्षति इसका प्रमाण है। आस्थापथ पर जगह-जगह जारी क्षति से नदी तटीय कई इलाकों के लिए खतरा पैदा हो गया है, मगर सिंचाई विभाग इसके स्थायी उपाय और ट्रीटमेंट की बजाए बाढ़ सुरक्षा के तहत अस्थायी कार्यों पर फिजूलखर्ची कर रहा है।
क्या कहते हैं लोग
सामाजिक कार्यकर्ता जगदीश कुलियाल, रामराज बडोनी, सुरेंद्र भंडारी, संजय अग्रवाल, एमएस खरोला आदि का कहना है कि आस्थापथ के निर्माण से पहले कार्यदायी एजेंसी को प्रशासन के सहयोग से नदी तटों को अतिक्रमण से मुक्त करना था। इसके बाद योजना का कार्य किया जाता।
बाढ़ से त्रिवेणीघाट में करीब 100 मीटर और आस्थापथ के 260 मीटर भाग को नुकसान हुआ है, जिसके लिए दैवी आपदा मद में क्रमश: डेढ़ करोड़ और छह करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी के बाद निर्माण कराया जाएगा। ।
--सुधीर मोहन, एसडीओ सिंचाई विभाग
क्षतिग्रस्त आस्थापथ पर फौरी सुरक्षा उपायों के तहत दैवी आपदा मद से करीब 35 लाख की लागत से अस्थायी कार्य कराया जा रहा है। वास्तविक डीपीआर बरसात के बाद बनाई जाएगी।
--टीएस गुसाईं, एसडीओ सिंचाई विभाग मुनिकीरेती