देहरादून। राजधानी के मास्टर प्लान को लेकर लगभग आठ साल का वक्त केवल ड्राफ्ट तैयार करने और आपत्तियों की सुनवाई में लग गया। अब यह शासन में लटका हुआ है। इससे जहां अनियोजित विकास को बढ़ावा मिल रहा है वहीं मास्टर प्लान को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है।
संशोधित मास्टर प्लान पर जन सुनवाई चार माह पहले पूरी हो चुकी है। इसके बाद यह शासन को भेज दिया गया, लेकिन अब शासन स्तर पर इसे फाइनल करने में विलंब किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि विलंब करने के पीछे अंदर खाने खेल किया जा रहा है। इसी कारण इसे लगातार लटकाया जा रहा है। मास्टर प्लान लटकने के कारण शहर का सजरा प्लान लटका हुआ है। सजरा प्लान पर भी होमवर्क लगभग पूरा हो चुका है। मास्टर प्लान फाइनल होते ही इसे भी अंतिम स्वरूप प्रदान कर दिया जाएगा।
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क्या है सजरा प्लान
सजरा प्लान में एक-एक भूखंड के भू-उपयोग के बारे में आसानी से जानकारी मिल जाएगी। किस खसरा नंबर का भू उपयोग क्या है। इसे चेक किया जा सकता है। अभी तक उत्तराखंड में ऐसी कोई व्यवस्था लागू नहीं है।
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अगस्त के पहले सप्ताह में राजधानी के संशोधित मास्टर प्लान को लागू कर दिया जाएगा। इसको लेकर विभागीय अधिकारियों के साथ एक बैठक होनी है, जिसके बाद इसे फाइनल कर दिया जाएगा। -- एमएच खान, सचिव आवास
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संशोधित मास्टर प्लान डेढ़ साल से लंबित पड़ा हुआ है। एमडीडीए से लेकर शासन स्तर पर इसको लेकर विलंब किया गया। इससे पूरे शहर में अनियोजित विकास हुआ। यह शहर के लिए ठीक नहीं है। मास्टर प्लान को जल्द लागू करना चाहिए। -- डीएस राणा, उत्तरांचल इंजीनियर्स एवं ड्राफ्टमैन वेलफेयर एसोसिएशन