देहरादून। स्कूल वैन के लिए परमिट प्रक्रिया के बाद बच्चों को वाहनों से स्कूल भेजने वाले अभिभावकों की परेशानी बढ़ सकती है। कारण कि परमिट प्रक्रिया लागू होने के बाद एसोसिएशन से जुड़े 50 फीसदी वैन संचालक इससे किनारा करने लगे हैं। ऐसे में तमाम अभिभावकों को नया वाहन ढूंढने के लिए मशक्कत करनी होगी।
प्रदेश वैन एसोसिएशन से संबद्धता रखने वाले करीब 450 वैन संचालक अभी तक बच्चों को ढोते हैं। इनमें 35 फीसदी (करीब 160) वैन परमिट के लिए तय की गई आयु सीमा से बाहर हो गई हैं। 15 फीसदी (करीब 50) वैन संचालक परमिट प्रक्रिया में आ रहे खर्च से घबरा गए हैं। उन्होंने किसी अन्य व्यवसाय में अपनी वैन लगाने या उसे बेचने का मन बना लिया है। उक्त आंकड़ों से साफ है कि परमिट प्रक्रिया में 235 वैन ही स्कूल कैब में पंजीकृत हो सकेंगी। 215 वैनों के इस व्यावसाय से हट जाने पर सैकड़ों अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
प्रति वैन घंट जाएंगे बच्चे
परमिट प्रक्रिया के बाद एक वैन में 12 साल से अधिक उम्र के आठ या नौ बच्चे ही बैठ सकेंगे, जबकि वर्तमान में एक-एक वैन में 20 से 22 बच्चे ढोए जा रहे हैं।
परमिट का खर्च
कामर्शियल इंश्योरेंस : 19,000 रुपये वार्षिक
परिवहन विभाग का टैक्स: 6,000 रुपये वार्षिक
परमिट शुल्क : 18,00 रुपये एकमुश्त
परमिट की व्यवस्था आरंभ होने से स्कूल वैन एसोसिएशन में पंजीकृत 450 वैन संचालकों में से सवा दौ सौ लोग ही परमिट लेने के लिए हामी भर रहे हैं। - सचिन गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष, स्कूल वैन एसोसिएशन