देहरादून। एक जुलाई से स्कूल खुल गए हैं। ऐसे में परेडग्राउंड-डोईवाला-जौलीग्रांट रूट से जुड़े गांवों के निवासियों के लिए शहर आने-जाने में वाहनों का संकट बढ़ गया है। इस रूट पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद से 26 सिटी बसों का संचालन नौ जून से बंद है। अब केवल 20 सिटी बसों के परमिट ही वैध रह गए हैं। ऐसे में इस रूट से जुड़े दर्जनों गांवों के निवासियों, स्कूल कालेज पढ़ने वाले छात्रों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
जौलीग्रांट स्थिति हिमालयन इंस्टीट्यूट के छात्र परेशान हैं तो वहीं दून आने वाले सैकड़ों लोगों को बसों का लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि बसों के खचाखच भर जाने से बीच गांवों से सवार होने वाली छात्राओं और महिलाओं को सफर करने में दिक्कत हो रही है। दूसरी ओर बंद हुई बसों के प्रधान रघुवीर सिंह नेगी का कहना है कि बस मालिक, चालक और परिचालक के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
क्यों बंद हुई सेवा
वर्ष 2009 से पहले तक इस रूट पर 20 सिटी बसों के परमिट थे। लेकिन सवारियों की संख्या और रूट डोईवाला से जौलीग्रांट तक बढ़ाकर रूट पर एसटीए ने वर्ष 2009 में 42 नए परमिट जारी किए। इसके विरोध में पुरानी 20 सिटी बस संचालकों के हाईकोर्ट जाने से बार-बार इस रूट की बसें बंद हो जाती हैं। बंद हुई बसों के संचालक अब रोक के आदेश पर स्टे के लिए हाईकोर्ट की डबल बेंच में डेट मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
इन गांवों के लोग हैं परेशान
जौलीग्रांट, भानियावाला, थानों, रानी पोखरी, डोईवाला, तेलीवाला, खैरी, बुल्लावाला, लच्छीवाला, दुधली, नागल ज्वालापुर, नागल बुलंदावाला, कैमरी, नौका, हर्रावाला, बालावाला, जोगीवाला, मोहकमपुर आदि।