देहरादून। राज्य के पर्वतीय मार्गों पर मुसाफिरों को मंजिल तक पहुंचाने वाली परिवहन निगम की बसों में सफर भगवान भरोसे है। तय सीमा से कहीं अधिक चल चुकी खटारा बसों में जान हथेली पर रखकर चढ़ने वाले यात्रियों के लिए हर पल ऊपरवाले को याद करना मजबूरी बन जाता है। हालांकि, हादसे के वक्त रोडवेज के प्रशिक्षित चालक सूझबूझ से मुसाफिरों की जान तो बचा लेते हैं, लेकिन बदहाल बसों का स्टीयरिंग थाम सड़क पर निकलने के बाद आखिरी स्टेशन पर रुकने तक उनमें भी धुकधुकी लगी रहती है। न ब्रेक का भरोसा, न इंजन काबिल, कभी आयल लीक तो कभी स्टीयरिंग लॉक। इधर इन मुसीबतों का खतरा और उधर सैकड़ों मीटर गहरी खाई। सड़क पर मीटर दर मीटर बसें खिसकाते रोडवेज चालकों और पीछे बैठी सवारियों के मन में हर वक्त यही सवाल उठता है कि आखिर कब उन्हें नई बसें नसीब होंगी और आखिर कब तक चालकों की सूझबूझ हादसे टालती रहेगी।
एक लाख किमी ज्यादा चली मसूरी वाली बस
गत शनिवार को दून से 45 यात्रियों को लेकर मसूरी के लिए निकली रोडवेज बस संख्या यूके07एफ7761 के साथ हुआ हादसा साफ करता है कि निगम में किस तरह बसों को उम्र पार करने के बावजूद घसीटा जा रहा है। परिवहन विभाग में एक अप्रैल 2009 को पंजीकृत यह बस अब तक 5,92,622 किलोमीटर का सफर तय कर चुकी है। इसका परिणाम शनिवार को सामने आया, जब अचानक ब्रेक फेल हो गए। हालांकि, चालक ने बस का पिछला हिस्सा पहाड़ी से टकराकर मुसाफिरों की जान बचा ली।
मानक की आड़ में खिलवाड़
पर्वतीय मार्गों पर रोडवेज बसों के संचालन के लिए निगम में दोहरे मानक बनाए गए हैं। इनके मुताबिक पहाड़ पर बसों को पांच लाख किलोमीटर से अधिक नहीं चलाया जा सकता, लेकिन बस की आयुसीमा छह वर्ष तय की गई है। उम्र का यही मानक निगम को यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ की छूट देता है। दरअसल, निगम की 12 बसें छह लाख किलोमीटर तक चल चुकी हैं, लेकिन छह वर्ष की अवधि पूरी न होने के कारण निगम इन्हें सड़कों से नहीं हटा रहा। जबकि इनसे हर वक्त हादसे का खतरा बना रहता है। दूसरी ओर, 70 बसें पांच लाख किलोमीटर की सीमा तक पहुंचने की कगार पर हैं, लेकिन इनकी जगह भी अब तक नई बसें लाने की कोई योजना नहीं है।
कितना चल सकती है रोडवेज बस
रूट किलोमीटर उम्र
पहाड़ 5 लाख 6 वर्ष
मैदान 8 लाख 6 वर्ष
यह है बसों की स्थिति
मानक बस संख्या खरीद वर्ष
दो से तीन लाख किमी 27 2011
चार से 5 लाख किमी 70 2008-09
पांच लाख किमी से पार 12 2007-09
(नोट: ये आंकड़े देहरादून के पर्वतीय डिपो की बसों के हैं, ये बसें लगभग पूरे गढ़वाल मंडल को कवर करती हैं)
दून से यहां जा रहीं बसें
पुरोला, बड़कोट, उत्तरकाशी, चकराता, चंबा, नई टिहरी, श्रीनगर, मसूरी, लैंसडौन।
तय मानक पूरे होने तक बस का संचालन किया जाता है। हालांकि इससे पहले अगर बस की स्थिति खराब है तो उसे कंडीशन के हिसाब से संचालन से हटाया जा सकता है।
-दीपक जैन, महाप्रबंधक तकनीकी, रोडवेज
हम कई बार निगम अधिकारियों से नई बसों की मांग कर चुके हैं, लेकिन बसें नहीं मिल रहीं। ऐसे में यात्रियों की अधिकता और बसों की कमी के कारण पुरानी बसें चलानी पड़ती हैं।
-पूजा केहरा, एआरएम, पर्वतीय डिपोे