देहरादून। अमर उजाला की मुहिम ‘आइए बचाएं इस चिरैया को’ से लोग बड़ी तादाद में जुड़ रहे हैं। रविवार को इसी मुहिम से प्रभावित यूथ फार ए सोशल काज संस्था की ओर से साइकिल रैली निकाली गई। यह रैली सुबह साढ़े नौ बजे घंटाघर से शुरू हुई, जो दिलाराम चौक होते हुए वापस राजपुर रोड से घंटाघर पहुंचकर संपन्न हुई। साइकिलों पर ‘सेव द गर्ल चाइल्ड’ का संदेश देते पोस्टर लगाए गए थे। इनके जरिए युवाओं ने सभी बच्चियाें को बचाने का आह्वान किया। सैम साइकिल क्लब के सहयोग से आयोजित इस रैली में 50 से अधिक युवाओं ने शिरकत की। इसके पश्चात घंटाघर पर गर्मी में लोगों की प्यास बुझाने को छबीलें भी लगाई गईं। शर्बत बांटा गया। इस रैली में वकीलों, चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, डाक्टर आदि सभी वर्गों ने हिस्सा लिया। इस दौरान हिमांशु दुआ, विनय गुप्ता, माधवी मित्तल, रवनीत कौर, अंबर, बनीत कुमार कोहली, आशीष कुमार, भास्कर चक्रवर्ती, पंकज शर्मा, समीर नरूला, सुमित ग्रोवर आदि का सहयोग रहा।
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काश बदल जाएं इस डायरी के पन्ने....
देहरादून। समाज को संवेदनशील बनाने में मोबाइल फोन के माध्यम से भेजे जाने वाले एसएमएस का भी विशेष योगदान है। इन दिनों ‘एक अजन्मे बच्चे की डायरी’ समेटे एक एसएमएस तेजी से एक-से-दूसरे फोन में भेजा जा रहा है, जो कन्या भ्रूण हत्या पर करारा प्रहार है। आइए कोशिश करें, ताकि बदल सकें इस डायरी के पन्ने।
कुछ यूं है एसएमएस :
एक अजन्मे बच्चे की डायरी-
15 जून-मैं ओवरी से अटैच हूं
17 जून-मैं अब टिश्यू हूं
30 जून-मुझे मां से खाना मिला
15 जुलाई-मां पापा से बोली-वो पापा बनेंगे, पापा बहुत खुश हुए
15 सितंबर-मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा है
14 अक्तूबर-अब मेरे छोटे-छोटे हाथ, पैर, सिर और पेट हैं
13 नवंबर-आज मेरा अल्ट्रा स्कैन हुआ, अहा! मैं लड़की हूं
14 नवंबर-ओह! मेरे मां-पापा ने मुझे मार दिया!
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इनके आए फोन :
सुरेंद्र बाली, डोईवाला
उषा राघव, डालनवाला
नितीश बिष्ट, नेशविला रोड
गुणवंत सिंह, टैगोर विला
प्रभा जोशी, चकराता रोड
शिवम, झाझरा
ज्योति नेगी, विकासनगर
करण गौरव, राजपुर रोड
नेहा बिष्ट, करनपुर
मीनल रावत, धर्मपुर